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4 Directions Holidays Every traveler has a tale to tell. we are here to hear your stories.....

"𝐌𝐚𝐲 𝐓𝐡𝐞 𝐇𝐨𝐥𝐲 𝐓𝐞𝐚𝐜𝐡𝐢𝐧𝐠𝐬 𝐎𝐟 𝐆𝐮𝐫𝐮 𝐍𝐚𝐧𝐚𝐤 𝐃𝐞𝐯𝐉𝐢 𝐆𝐮𝐢𝐝𝐞 𝐘𝐨𝐮 𝐓𝐡𝐨𝐮𝐠𝐡 𝐓𝐡𝐞 𝐑𝐢𝐠𝐡𝐭 𝐏𝐚𝐭𝐡 𝐈𝐧 𝐘𝐨𝐮𝐫 𝐋𝐢𝐟𝐞"
08/11/2022

"𝐌𝐚𝐲 𝐓𝐡𝐞 𝐇𝐨𝐥𝐲 𝐓𝐞𝐚𝐜𝐡𝐢𝐧𝐠𝐬 𝐎𝐟 𝐆𝐮𝐫𝐮 𝐍𝐚𝐧𝐚𝐤 𝐃𝐞𝐯𝐉𝐢 𝐆𝐮𝐢𝐝𝐞 𝐘𝐨𝐮 𝐓𝐡𝐨𝐮𝐠𝐡 𝐓𝐡𝐞 𝐑𝐢𝐠𝐡𝐭 𝐏𝐚𝐭𝐡 𝐈𝐧 𝐘𝐨𝐮𝐫 𝐋𝐢𝐟𝐞"


Greetings to the People of   on Its Statehood Day.
01/11/2022

Greetings to the People of on Its Statehood Day.

May the light of diyas bring you prosperity, happiness, and success. I wish you and your loved ones a very
24/10/2022

May the light of diyas bring you prosperity, happiness, and success. I wish you and your loved ones a very

01/10/2022

Chunri Yatra Raisen

महिषमर्दिनी की यह प्रतिमा भारत मे ज्ञात शुरुआती शाक्त गुहाप्रतिमाओं में से एक है। यहां पहाड़ की दीवार को तराशकर मूर्ति को...
27/09/2022

महिषमर्दिनी की यह प्रतिमा भारत मे ज्ञात शुरुआती शाक्त गुहाप्रतिमाओं में से एक है। यहां पहाड़ की दीवार को तराशकर मूर्ति को उकेरा गया है। गुप्तकाल में बनी इस प्रतिमा में देवी को बारह हाथों के साथ दर्शाया गया है जहाँ वे इन हाथों में आयुध धारण किये हुए महिष नामक दैत्य के साथ युद्धरत हैं। देवी महिष के मस्तक को अपने दाहिने पैर से दबाए हुए हैं और उसका मर्दन कर रही हैं। देवी का यह शक्तिरूप है।
महिष को पशुरूप में दर्शाया गया है जो बाद में मानवीय रूप में दर्शाया जाने लगा।

यह प्रतिमा मध्यप्रदेश के उदयगिरि (विदिशा) में है। उदयगिरि गुप्कालीन गुफामन्दिरों के लिए सुप्रसिद्ध है जिनका निर्माण चौथी और पांचवी सदी में किया गया था।

महिषमर्दिनी मां हम सब पर कृपादृष्टि बनाए रखें।
आप सभी को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं



क्या यह आधुनिक तकनीकों वाला युग नींव खोदे बिना एक गगनचुंबी इमारत के निर्माण की कल्पना कर सकता है ? यह तमिलनाडु का बृहदेश...
17/09/2022

क्या यह आधुनिक तकनीकों वाला युग नींव खोदे बिना एक गगनचुंबी इमारत के निर्माण की कल्पना कर सकता है ?

यह तमिलनाडु का बृहदेश्वर मंदिर है, यह बिना नींव का मंदिर है । इसे इंटरलॉकिंग विधि का उपयोग करके बनाया गया है इसके निर्माण में पत्थरों के बीच कोई सीमेंट, प्लास्टर या किसी भी तरह के चिपकने वाले पदार्थों का प्रयोग नहीं किया गया है इसके बावजूद पिछले 1000 वर्षों में 6 बड़े भूकंपो को झेलकर भी आज अपने मूल स्वरूप में है ।

216 फीट ऊंचा यह मंदिर उस समय दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर था। इसके निर्माण के कई वर्षों बाद बनी पीसा की मीनार खराब इंजीनियरिंग की वजह से समय के साथ झुक रही है लेकिन बृहदेश्वर मंदिर पीसा की मीनार से भी प्राचीन होने के बाद भी अपने अक्ष पर एक भी अंश का झुकाव नहीं रखता ।

इस मंदिर के निर्माण के लिए 1.3 लाख टन ग्रेनाइट का उपयोग किया गया था जिसे 60 किलोमीटर दूर से 3000 हाथियों द्वारा ले जाया गया था। इस मंदिर का निर्माण पृथ्वी को खोदे बिना किया गया था यानी यह मंदिर बिना नींव का मंदिर है ।

मंदिर टॉवर के शीर्ष पर स्थित शिखर का वजन 81 टन है आज के समय में इतनी ऊंचाई पर 81 टन वजनी पत्थर को उठाने के लिए आधुनिक मशीनें फेल हो जाएंगी ।

बृहदीश्वर मंदिर के निर्माण के लिए प्रयोग किए गए इंजीनियरिंग के स्तर को दुनिया के सात आश्चर्यों में से किसी भी आश्चर्य के निर्माण की तकनीक मुकाबला नहीं कर सकती और आज की तकनीकों को देखकर भविष्य में भी कई सदियों तक ऐसा निर्माण सम्भव नहीं दिखता है ।

“A wish for you on your birthday, whatever you ask may you receive, whatever you seek may you find, whatever you wish ma...
13/09/2022

“A wish for you on your birthday, whatever you ask may you receive, whatever you seek may you find, whatever you wish may it be fulfilled on your birthday and always. Happy birthday! Beta Dev” 🎂💐😊❤️💋

Happy Birthday Beta Enjoy your Day 🎂💐💕
13/09/2022

Happy Birthday Beta Enjoy your Day 🎂💐💕

आनंद से भरा रहे जीवन तुम्हारा,
हर सपना पूरा होता रहे तुम्हारा,
मेरे बेटे तुम्हारे होने से हम खुश हैं इतना
क्या कहें, बस दे सकते हैं आशीर्वाद अपना ढेर सारा।
Happy Birthday Beta Dev! 🎂💐 ❤️

13/09/2022

लोग बदलते नहीं बस सिर्फ इतना होता है, कि आप में या तो उनकी दिलचस्पी खत्म हो जाती है ...
या तो आपसे ज्यादा दिलचस्प उनको कोई और मिल जाता है!

इन्हें पिछले 2/3 सालों से आंखें ढूंढ रही थीं पर इनका दीदार आज हुआ है। इनका दिखना मनमांगी किसी मुराद के पूरा होने जैसा था...
12/09/2022

इन्हें पिछले 2/3 सालों से आंखें ढूंढ रही थीं पर इनका दीदार आज हुआ है। इनका दिखना मनमांगी किसी मुराद के पूरा होने जैसा था।
नाइटजार ! हाँ यहीं नाम है इनका। हिंदीभाषी इन्हें चपका के नाम से भी जानते होंगे पर इनकी संख्या बहुत ही कम होने की वजह से यह कभी कभार ही नजर आते हैं।
नाइटजार उल्लू की तरह ही शाम होने के बाद से पूरी रात सक्रिय रहते हैं। शोरगुल और इंसानी दखल इन्हें कतई पसंद नहीं है। अब इंसान तो इंसान हैं उन्हें चपका के ऑब्जेक्शन से क्या फर्क पड़ने वाला है और यही वजह है कि यह विलुप्ती के कगार पर हैं।
पूरी जिंदगी बिना घोसले के पेड़ों पर बिता देने वाला यह पक्षी वर्ष में केवल एक बार 2 अंडे देता है और अपने अंडों को धूप/पानी से बचाने के लिए उन पर पंख डाले बैठा रहता है।
Suneeta Aarya

Van Vihar National Park and Zoo Bhopal

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Arjun Nagar
Raisen
464551

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