Mahro chokho rajasthan

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22/08/2020

खम्मा घनी सा🙏
आज आपणा राजस्थान सु जुड़्योड़ी पांच मजेदार बातां।।

1. ज्यादातर बड़े शहर रंगों से भी पहचाने जाते है।
#गुलाबी #नगर #जयपुर आप सभी को पता है ही
इसके अलावा #झालावाड़ #पर्पल
#जोधपुर #नीला और
#उदयपुर #सफेद 👍

2.राज्य में दक्षिण से उत्तर में फैली हुई अरावली पर्वतमाला,अपने देश की सबसे पुरानी श्रृंखला है।😱

3.भारत का सबसे बड़ा मरुस्थल भी राजस्थान का ही है।

4.रेत के टीबे ही नही ,आपने यहां hill स्टेशन भी तो है

😍
5. चूहों वाली माता, देशनोक ,करनी माता भी तो अपने राजस्थान की ही शान है।

𝐁𝐨𝐧𝐮𝐬: *अगली पोस्ट में कुलधरा गांव का रहस्य*
𝐍𝐞𝐱𝐭 𝐩𝐨𝐬𝐭 𝐨𝐧 𝐤𝐮𝐥𝐝𝐡𝐚𝐫𝐚 𝐯𝐢𝐥𝐥𝐚𝐠𝐞

😍🙏🙏🙏

आज आपको अपने ही देश यानी की भारत के एक ऐसे डरावने किले के बारे में बताया जायेगा, जहां सूरज डूबते ही रूहों का कब्‍जा हो ज...
03/10/2014

आज आपको अपने ही देश यानी की भारत के एक ऐसे डरावने किले के बारे में बताया जायेगा, जहां सूरज डूबते ही रूहों का कब्‍जा हो जाता है और शुरू हो जाता है मौत का तांडव। राजस्‍थान के दिल जयपुर में स्थित इस किले को भानगड़ के किले के नाम से जाना जाता है। तो आइये इस लेख के माध्‍यम से भानगड़ किले की रोमांचकारी सैर पर निकलते हैं।

भानगड़ किला एक शानदार अतीत के आगोश में

भानगड़ किला सत्रहवीं शताब्‍दी में बनवाया गया था। इस किले का निर्माण मान सिंह के छोटे भाई राजा माधो सिंह ने करावाया था। राजा माधो सिंह उस समय अकबर के सेना में जनरल के पद पर तैनात थे। उस समय भानगड़ की जनसंख्‍या तकरीबन 10,000 थी। भानगढ़ अल्‍वार जिले में स्थित एक शानदार किला है जो कि बहुत ही विशाल आकार में तैयार किया गया है।

चारो तरफ से पहाड़ों से घिरे इस किले में बेहतरीन शिल्‍पकलाओ का प्रयोग किया गया है। इसके अलावा इस किले में भगवान शिव, हनुमान आदी के बेहतरीन और अति प्राचिन मंदिर विध्‍यमान है। इस किले में कुल पांच द्वार हैं और साथ साथ एक मुख्‍य दीवार है। इस किले में दृण और मजबूत पत्‍थरों का प्रयोग किया गया है जो अति प्राचिन काल से अपने यथा स्थिती में पड़े हुये है।

भानगड किले पर कालें जादूगर सिंघिया का शाप

भानगड़ किला जो देखने में जितना शानदार है उसका अतीत उतना ही भयानक है। आपको बता दें कि भानगड़ किले के बारें में प्रसिद्व एक कहानी के अनुसार भागगड़ की राजकुमारी रत्‍नावती जो कि नाम के ही अनुरूप बेहद खुबसुरत थी। उस समय उनके रूप की चर्चा पूरे राज्‍य में थी और साथ देश कोने कोने के राजकुमार उनसे विवाह करने के इच्‍छुक थे।

उस समय उनकी उम्र महज 18 वर्ष ही थी और उनका यौवन उनके रूप में और निखार ला चुका था। उस समय कई राज्‍यो से उनके लिए विवाह के प्रस्‍ताव आ रहे थे। उसी दौरान वो एक बार किले से अपनी सखियों के साथ बाजार में निकती थीं। राजकुमारी रत्‍नावती एक इत्र की दुकान पर पहुंची और वो इत्रों को हाथों में लेकर उसकी खुशबू ले रही थी। उसी समय उस दुकान से कुछ ही दूरी एक सिंघीया नाम व्‍यक्ति खड़ा होकर उन्‍हे बहुत ही गौर से देख रहा था।

सिंघीया उसी राज्‍य में रहता था और वो काले जादू का महारथी था। ऐसा बताया जाता है कि वो राजकुमारी के रूप का दिवाना था और उनसे प्रगाण प्रेम करता था। वो किसी भी तरह राजकुमारी को हासिल करना चाहता था। इसलिए उसने उस दुकान के पास आकर एक इत्र के बोतल जिसे रानी पसंद कर रही थी उसने उस बोतल पर काला जादू कर दिया जो राजकुमारी के वशीकरण के लिए किया था।

क्या हुआ राजकुमारी रत्नावती के साथ

राजकुमारी रत्‍नावती ने उस इत्र के बोतल को उठाया, लेकिन उसे वही पास के एक पत्‍थर पर पटक दिया। पत्‍थर पर पटकते ही वो बोतल टूट गया और सारा इत्र उस पत्‍थर पर बिखर गया। इसके बाद से ही वो पत्‍थर फिसलते हुए उस तांत्रिक सिंघीया के पीछे चल पड़ा और तांत्रिक को कुलद दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गयी। मरने से पहले तांत्रिक ने शाप दिया कि इस किले में रहने वालें सभी लोग जल्‍द ही मर जायेंगे और वो दोबारा जन्‍म नहीं ले सकेंगे और ताउम्र उनकी आत्‍माएं इस किले में भटकती रहेंगी।

उस तांत्रिक के मौत के कुछ दिनों के बाद ही भानगडं और अजबगढ़ के बीच युद्व हुआ जिसमें किले में रहने वाले सारे लोग मारे गये। यहां तक की राजकुमारी रत्‍नावती भी उस शाप से नहीं बच सकी और उनकी भी मौत हो गयी। एक ही किले में एक साथ इतने बड़े कत्‍लेआम के बाद वहां मौत की चींखें गूंज गयी और आज भी उस किले में उनकी रू‍हें घुमती हैं।

किलें में सूर्यास्‍त के बाद प्रवेश निषेध

फिलहाल इस किले की देख रेख भारत सरकार द्वारा की जाती है। किले के चारों तरफ आर्कियोंलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) की टीम मौजूद रहती हैं। एएसआई ने सख्‍त हिदायत दे रखा है कि सूर्यास्‍त के बाद इस इलाके किसी भी व्‍यक्ति के रूकने के लिए मनाही है। इस किले में जो भी सूर्यास्‍त के बाद गया वो कभी भी वापस नहीं आया है। कई बार लोगों को रूहों ने परेशान किया है और कुछ लोगों को अपने जान से हाथ धोना पड़ा है। इस ऐतिहासिक किले की यात्रा करने के लिए आप नीचे दिये गये लिंक पर‍ क्लिक करें और जानें कि आप कैसे इस जगह जा सकतें हैं।

किलें में रूहों का कब्‍जा

इस किले में कत्‍लेआम किये गये लोगों की रूहें आज भी भटकती हैं। कई बार इस समस्‍या से रूबरू हुआ गया है। एक बार भारतीय सरकार ने अर्धसैनिक बलों की एक टुकड़ी यहां लगायी थी ताकि इस बात की सच्‍चाई को जाना जा सकें, लेकिन वो भी असफल रही कई सैनिकों ने रूहों के इस इलाके में होने की पुष्ठि की थी। इस किले में आज भी जब आप अकेलें होंगे तो तलवारों की टनकार और लोगों की चींख को महसूस कर सकतें है।

इसके अलांवा इस किले भीतर कमरों में महिलाओं के रोने या फिर चुडि़यों के खनकने की भी आवाजें साफ सुनी जा सकती है। किले के पिछले हिस्‍सें में जहां एक छोटा सा दरवाजा है उस दरवाजें के पास बहुत ही अंधेरा रहता है कई बार वहां किसी के बात करने या एक विशेष प्रकार के गंध को महसूस किया गया है। वहीं किले में शाम के वक्‍त बहुत ही सन्‍नाटा रहता है और अचानक ही किसी के चिखने की भयानक आवाज इस किलें में गुंज जाती है। आपको यह आर्टिकल कैसा लगा कमेंट बॉक्‍स में अपने विचार जरूर दें।

22/07/2014

जब आँख खुले तो धरती राजस्थान की हो !
जब आँख बंद हो तो यादे राजस्थान की हो !
मैं मर भी जाऊ तो कोई गम नहीं ,
लेकिन मरते वक्त मिटटी राजस्थान की हो !!

मारवाडी रो दिल......नरम आईसकीम जेसो

मारवाडी री जबान....मीठी जलेबी जेसी

मारवाडी रो गुसो ....गरम फुलको जेसो

मारवाडी रो साथ.... चटपटो आचार जेसो

मारवाडी रो होसलो.. कडक खाखरा जेसो

मारवाडी रो स्वभाव.. मिलनशार दालढोकली जेसो

(केने को मतबल यो के मारवाडी के साथ रहो तो भुखा कोणी मरो)

लाइक & शेयर (y) रंगीलो राजस्थान - पधारो म्हारे देश

13/07/2014

क्या आप जानते हैं...... In Hindu mythology, the state of Rajasthan has
an importance all of its own. It is believed that
Lord Ram of the Hindu epic Ramayana spent
sometime in the jungles of Rajasthan during his
14 year long exile, as did the Pandavas from
another Hindu magnum opus, the Mahabharata .

आपका दिल कहे तो इस फोटो को जरुर लाइक करना जय सिया राम जय जय हनुमान ......
10/02/2014

आपका दिल कहे तो इस फोटो को जरुर लाइक करना जय सिया राम जय जय हनुमान ......

मन में स्वतंत्रता, शब्दों में आस्था, हमारे दिल और गर्व में हमारी आत्मा में यादें ... सलामी चलें, गणतंत्र दिवस पर राष्ट्र...
26/01/2014

मन में स्वतंत्रता,
शब्दों में आस्था,
हमारे दिल और गर्व में
हमारी आत्मा में यादें ...
सलामी चलें,
गणतंत्र दिवस पर राष्ट्र!
वंदे मातरम्..........................

25/01/2014

हम हमारी पहली मील का पत्थर के पीछे सिर्फ एक कदम है .....
फेसबुक पर 100 likes .... आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद.....
इस पेज को अधिक उपयोगी बनाने के लिए like करें और इस पृष्ठ को share करें ...

जय माताजी की सा खम्मा घणी सा ज्वलंत राजस्थान के शीर्ष 10 splendoursराजस्थान , राजाओं की भूमि, जिसे उपयुक्त नाम है. यह वा...
25/01/2014

जय माताजी की सा
खम्मा घणी सा

ज्वलंत राजस्थान के शीर्ष 10 splendours

राजस्थान , राजाओं की भूमि, जिसे उपयुक्त नाम है. यह वास्तव में महाराजाओं और उनके राजसी किलों और भव्य महलों में से एक शानदार दायरे में है. एक अमीर और रोमांटिक अतीत के अवशेष, विचारोत्तेजक खंडहर में या पूर्व महिमा को बहाल, या तो राजस्थान सबसे 'यात्रियों की इच्छा सूची पर एक स्थान अर्जित किया है. फिर भी इस उपमहाद्वीप का यह प्रतिष्ठित क्षेत्र के लिए भी बहुत कुछ है. यह एक रेगिस्तान और जंगल, ऊंट गाड़ियों और बाघों की भूमि, शानदार गहने, ज्वलंत कला और जीवंत संस्कृति है. वहाँ एक कैलेंडर और एक कलाकार की पैलेट को भरने के लिए यहां पर्याप्त त्योहार हैं, और शॉपिंग और भोजन शानदार से कम नहीं हैं. यह विभिन्न चौंकाने और अविश्वसनीय आकर्षण के बावजूद, भारत के देखना होगा राज्य है.
उसका रंग आरोप शहरों भीड़ और उभरते भारत की अराजकता, मन और आत्मा में जगह के अतीत पकड़ गौरव के खजाने के साथ धड़कन है. समुद्र के नीले जोधपुर से अधिक बड़े उभरते शानदार मेहरानगढ़ नहीं है, पर गोल्डन Sandcastle जैसलमेर , के महलों उदयपुर , पुष्कर के श्रद्धालु अभी तक कार्निवल आकर्षण, की कहानियों का संग्रह whimsy बूंदी और चित्रित हवेलियों (सुशोभनता सजाया निवासों) शेखावाटी के माध्यम से छिड़का. राजस्थानियों उनके अमीर और अशांत इतिहास की ठीक ही गर्व कर रहे हैं और पर्यटन पर अर्थव्यवस्था की निर्भरता का एक पहचानने पावती नहीं है.

1. जयपुर
जयपुर , विजय नगर, यात्रियों गुलाबी गुदगुदी की आदत है. यहाँ आप एक अच्छी तरह से संरक्षित और रहने अतीत मिल जाएगा - और साथ ही आवास और भोजन विकल्प की एक धन - पहाड़ी किलों, शानदार महलों और गुनगुना, सौदा भरे बाजारों तेजस्वी. राजस्थानी शिल्प, वस्त्र, कला और, ज़ाहिर है, रत्न - हर जगह अंकुरण होने लगते हैं, जो कांच और क्रोम के विशाल मॉल, करने के लिए पुराने शहर के कालातीत बाजारों से, बिक्री के लिए मदों की एक अद्भुत सरणी है

बाकी के splendous अगले पोस्ट मे .

राजस्थान मुख्यत: एक कृषि व पशुपालन प्रधान राज्य है और अनाज व सब्जियों का निर्यात करता है।अल्प व अनियमित वर्षा के बावजूद,...
24/01/2014

राजस्थान मुख्यत: एक कृषि व पशुपालन प्रधान राज्य है और अनाज व सब्जियों का निर्यात करता है।
अल्प व अनियमित वर्षा के बावजूद, यहाँ लगभग सभी प्रकार की फ़सलें उगाई जाती हैं।
रेगिस्तानी क्षेत्र में बाजरा, कोटा में ज्वार व उदयपुर में मुख्यत: मक्का उगाई जाती हैं।
राज्य में गेहूं व जौ का विस्तार अच्छा-ख़ासा (रेगिस्तानी क्षेत्रों को छोड़कर) है, ऐसा ही दलहन (मटर, सेम व मसूर जैसी खाद्य फलियाँ), गन्ना व तिलहन के साथ भी है। चावल की उन्नत किस्मों को लाया गया है एवं चंबल घाटी और इंदिरा गांधी नहर परियोजनाओं के क्षेत्रों में इस फ़सल के कुल क्षेत्रफल में बढ़ोतरी हुई है।
कपास व तंबाकू महत्त्वपूर्ण नक़दी फ़सलें हैं। हांलाकि यहाँ का अधिकांश क्षेत्र शुष्क या अर्द्ध शुष्क है, फिर भी राजस्थान में बड़ी संख्या में पालतू पशू हैं व राजस्थान सर्वाधिक ऊन का उत्पादन करने वाला राज्य है।
ऊँटों व शुष्क इलाकों के पशुओं की विभिन्न नस्लों पर राजस्थान का एकाधिकार है।
राजस्थान राज्य में वर्ष 2006-07 में कुल कृषि योग्य क्षेत्र 217 लाख हेक्टेयर था और वर्ष (2007-08) में अनुमानित खाद्यान उत्पादन 155.10 लाख टन रहा।
राज्य की मुख्य फ़सलें हैं- चावल, जौ, ज्वार, बाजरा, मक्का, चना, गेहूँ, तिलहन, दालें कपास और तंबाकू।
इसके अलावा पिछले कुछ वर्षो में सब्जियों और संतरा तथा माल्टा जैसे नीबू प्रजाति के फलों के उत्पादन में काफ़ी वृद्धि हुई है।
यहाँ की अन्य फ़सलें है लाल मिर्च, सरसों, मेथी, ज़ीरा, और हींग।

23/01/2014

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