01/05/2024
मिट्टी का कार्य:- लौट आती है वो तारीखे, मगर वो दिन लौट कर नहीं आते, हमारे टाइम पर जब स्कूल में पेपर हुआ करते थे उसके बाद मिट्टी का कार्य भी करवाया जाता था, और हम लोग शौक से अच्छा बनाने का प्रयास करते थे,जब खुद से नही बनता था तो अगल बगल अपने बडे भाई बहनो से बनवाते थे, और बनवा कर छत के उपर सुखाने रख देते थे,जब सुबह उठ कर स्कूल जाना होता था तो,अपने मिट्टी से बने फलो को एक किसी कापी के गते पर रख कर सजो के ले जाते थे, कभी कभी ऐसा भी होता था ले जाते समय रास्ते मै टूट जाते थे,तो रोते थे की नम्बर नही मिलेंगे,कभी कभी तो रस्सी झाडू यह चीजे भी लेके जाते थे,, बहुत ही सुन्दर जीवन था आज उन पलो को खूब याद करते हैं और अपने बच्चों को सुनाते हैं,☺️आशा करता हूं किसी ना किसी को इस पोस्ट को देखकर अपने जीवन के वो पल याद आये होंगे।। 🙏जय उत्तराखंड 🙏