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Over 1 year of formal communications regarding illegal operation of private (white plate) vehicles as taxis in Uttarakha...
21/08/2026

Over 1 year of formal communications regarding illegal operation of private (white plate) vehicles as taxis in Uttarakhand by Rapido. Zero actionable response. Private vehicles operate without commercial permits, violating MV Act & harming STA-authorized local businesses. Urgent action required!"

11/08/2026

"यह देश किसी शासन का नहीं, यहाँ की मिट्टी में स्वाभिमान बोने वाले युवाओं का है। जब-जब सत्य और अधिकारों के प्रश्न पर जनता...
21/07/2026

"यह देश किसी शासन का नहीं, यहाँ की मिट्टी में स्वाभिमान बोने वाले युवाओं का है। जब-जब सत्य और अधिकारों के प्रश्न पर जनता की आवाज़ को लाठियों और दमन से दबाने का प्रयास किया जाता है, तब-तब इतिहास नया मोड़ लेता है। मस्तक पर लगे ये घाव पराजय के चिह्न नहीं, बल्कि जनता की अटूट इच्छाशक्ति और साहस का प्रमाण हैं।"

Never stops dreamsNever die youres dream
15/06/2026

Never stops dreams
Never die youres dream

गंगा और यमुना का अवतरण: पूरी दुनिया जिस मां गंगा और मां यमुना के पानी से पवित्र होती है, उनका अवतरण और उद्गम इसी देवभूमि...
29/05/2026

गंगा और यमुना का अवतरण: पूरी दुनिया जिस मां गंगा और मां यमुना के पानी से पवित्र होती है, उनका अवतरण और उद्गम इसी देवभूमि (गंगोत्री और यमुनोत्री) में हुआ।

​2. "शिव का संबंध सिर्फ काशी और कैलाश से है?" – अधूरी जानकारी का सटीक उदाहरण

​यह बात कहकर तुमने साबित कर दिया कि तुमने कभी 'केदारखंड' और 'मानसखंड' (स्कंद पुराण) का नाम तक नहीं सुना।

​भगवान शिव का संबंध सिर्फ कैलाश से नहीं है। जब शिव जी ने पांडवों को दर्शन दिए, तो वह केदारनाथ की पावन भूमि थी।

​उत्तराखंड में सिर्फ एक ज्योतिर्लिंग नहीं, बल्कि पंचकेदार (केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मद्यमहेश्वर, कल्पेश्वर) हैं, जहाँ शिव के अलग-अलग अंगों की पूजा होती है।

​भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह कहीं और नहीं, बल्कि उत्तराखंड के त्रियुगीनारायण मंदिर में हुआ था, जिसकी पवित्र अग्नि आज भी जल रही है। क्या यह इतिहास तुम्हारे राज्यों में है?

​3. "सप्तऋषियों और संतों का उत्तराखंड से संबंध नहीं?" – सबसे बड़ा झूठ

​इतिहास को तोड़ना-मरोड़ना बंद करो।

​महर्षि व्यास ने यहीं निवास किया। आदि गुरु शंकराचार्य ने केरल से आकर अपने प्राण और अपनी तपस्या इसी उत्तराखंड (केदारनाथ) को समर्पित की और सनातन धर्म को पुनर्जीवित किया।

​राजा भगीरथ ने जहाँ तपस्या करके गंगा को धरती पर उतारा, वह गंगोत्री (उत्तराखंड) है।

​4. "52 शक्तिपीठों में से मात्र दो उत्तराखंड में हैं?" – आँखें खोलो और सत्य देखो

​हरिद्वार में मनसा देवी और चंडी देवी के अलावा, माता सती का हृदय जहाँ गिरा था, वह महाशक्तिपीठ चंद्रबदनी उत्तराखंड में है।

​माता सती के सती होने का स्थान, कनखल (हरिद्वार) इसी भूमि पर है, जहाँ से इस पूरी कथा की शुरुआत हुई।

​5. उत्तराखंड देवभूमि क्यों है?

​पूरा भारत अखंड है और हर राज्य का अपना महत्व है, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन उत्तराखंड को 'देवभूमि' इसलिए कहा जाता है क्योंकि:

​चार धाम (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) यहाँ स्थित हैं, जहाँ कदम रखते ही इंसान का अहंकार समाप्त हो जाता है।

​पांडव स्वर्गारोहण के लिए (स्वर्ग जाने का रास्ता) इसी उत्तराखंड के स्वर्गारोहिणी पहाड़ों से होकर गए थे।

​जब लक्ष्मण जी मूर्छित हुए थे, तब हनुमान जी जिस संजीवनी बूटी को लेने गए थे, वह द्रोणागिरी पर्वत भी इसी उत्तराखंड में है।

​आख़िरी चेतावनी:

उत्तराखंड की जनता शांत है, सौम्य है और मेहमानों का सत्कार करना जानती है। लेकिन हमारी शालीनता को हमारी कमजोरी समझने की भूल मत करना। अपनी घटिया राजनीति चमकाने के लिए हमारी आस्था, हमारे पहाड़ों और हमारी संस्कृति पर कीचड़ उछा

24/05/2026



Sorry harsh Bahi sahab hame ese haryana wale nahi chahiye jo hamari ganga maa ko badnaam kare nah aaye ese log hme nahi chahiye jo ganga me aake esi abhadrta kare

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