08/06/2021
*🌹 वट सावित्री पूजा-विधि कथा सहित 🌹*
*पूजन सामाग्री–*
बियन ८ टा, डाली ८ टा, बोहनी १ टा, अहिवात, उड़िद दाइल के बड़ १४ टा, सुतरी, सरवा २ टा, माईटक नाग-नागिन, केराक पात, लावा, एकटा सरवा मे दही, मुंग (फुलायल नैवेद्यक वास्ते), चना (फुलायल) , लाल कपड़ा, कनिया-पुतरा, साजी, अरवा चाउर, जनेऊ एक जोड़, गोटा सुपारी, फल, फूल, मिठाई, कांच हरदि, दुईब, गोटा धनिया, बिन्नी (लाल कपड़ा मे चाउर, दुईब, हरदि बान्हल), दूध ।
१. बोहनी आ सुतरी सँ बान्हल १४ टा बड़
२. केरा पात पर विष-विषहरा
३. विष-विषहरा
४. सरवा के ऊपर पानक पात पर गौर।
*पूजन विधि*
एक दिन पहिने व्रती (नव विवाहित कनिया) नहाय धोय कऽ अरवा-अरवाइन भोजन करथिन।
साँझ खनि पांच टा गीत— भगवती, महादेव, ब्राह्मण, हनुमान आर गौरी गीत गावि, दुईब, कांच हरदि, धनिया (कनी) मिला कऽ गौर बनत, जकरा ढउरल सरवा पर एकटा सिक्का पर गौरी राखि पानक पात सँ झांपि, पानक पात के ऊपर सिंदूरक गद्दी राखि ललका कपड़ा सँ झांपि भगवति लग राखल जायत।
उड़िद दालि के फुलाकऽ १४ टा बड़ पकाओल जायत, जकरा सरेला पर सुतरीमे गांथल जायत (बिना सुइया के) बड़ गुथल सुतरी के बोहनी के मुँह पर बान्हल जायत।
केराक पात पर सिन्दूर आ काजर सँ बिष-विषहारा लिखल जायत।
राति खन कनी मुंग आ बेसी बूट (काला चना) फुलय लऽ पड़त ।
वट सावित्री पूजाक दिन नव कनियाँ नहाय धोय कऽ सासुर सँ आयल नव कपड़ा पहिर, श्रृंगार कय, खोंईछ लय, भगवतीक पूजा कय, हाथ मे साजी (जाही मे कनिया-पुतरा रहत), आ माथ पर बोहनी (जाही मे लाबा भरल रहत आ जकरा मुँह पर सुतरी मे बान्हल 14 टा बड़ रहत) लय कऽ भगवती के गोड़ लागि सब संगे बड़क गाछ तर जेती। गाछ तर बोहनी मे राखल लाबा केराक पात पर राखि देथिन आ ओही बोहनी मे पानि भैर देथिन।
गाछ तर अरिपन रहत, एकटा अरिपन के ऊपर ७ टा बिअनि रहत आ सात टा डाली मे फुलायल बूंट, फल, मिठाई राखल रहत।
गाछ तर अहिवात जरायल जायत। एक टा डाली मे चाउर, सुपारी, जनऊ, पैसा, फल -मिठाई राखल रहत जे पूजा के बाद पंडितजी केँ देल जायत।
आमक पात पर ६० (साइठ) ठाम फुलायल मुंग आ फल-मिठाई के नवेद्य लगायल जायत।
एकटा बियनि पर आ एक टा आम पर पांच टा सिन्दूर लगा बड़क गाछ के जड़ि मे राखल जायत।
अरिपन पर विष-विषहारा लिखल पात राखि ओही पर माईटक विष-विषहारा राखल जायत।
कनिया एक टा बड़क पात केश में खोंसती।
सबटा ओरिआन बाद कनिया गौरी सबहक (सासूर बला, नहिअर बला जे राति में बनल आ विवाह बला) आगु नवेद्य राखि फूल आ सिन्दूर लय गौरी पूजती ओकरा बाद बिन्नी हाथ मे लय जांघ तर बोहनी राखि कथा सुनती।
कथा सुनला के बाद कनिया साड़ी के खूंट पर गाछ तर रखलाहा आम आ एक टा सिन्दूरक गद्दी लऽ कऽ मौली धागा बांधैत गाछ के चारू तरफ पांच बेर घूमती, फेर गाछ तर राखल बियनि से गाछ के तीन बेर होंकैत गला मिलती।
आब पुतरा के हाथ सँ कनिया के सिंदूरदान हेतई (कनिये करेती)
ओकरा बाद सबटा नैवेद्य उसगरती आ विष-विषहरा के दूध लाबा चढे़ती।
बोहनी में बान्हल सबटा बड़ के वायां हाथ के अंगुठा और अनामिका सँ तोरि कऽ एक बेर आगु आ एक बेर पाछु फेकैत फकरा पढ़ती—बड़ लिय (पाछु ), मर दिय (आगु)
ओकरा बाद माथ पर फेर बोहनी उठेती, हाथ मे साजी लेती आ भगवती घर मे ऐती।
गाछ तर राखल डाली सेहो उठि कऽ भगवती घर मे रखायत।
भगवती के गोर लागि सात टा अहिवाती के डाली देथिन आ सब पैघ सब के गोर लागि आशीर्वाद लेती।
*वट सावित्री कथा*
एक टा गाम मे एकटा ब्राह्मण अपना कनिया और सात टा पुत्र संगे खुशी खुशी रहैत छलाह। हुनका घर के चौका मे चिनवार लग एक टा नाग-नागिन अपन बिल बना क रहैत छल। ब्राह्मणक कनिया साँपक डरे प्रतिदिन भात पसेला कऽ बाद ओकर गरम माँर साँपक बिल मे ढारि दैत छलईथ जाहि सँ साँपक सबटा पोआ (बच्चा) सब मरि जाईत छल। निरंतर अपन पोआ सब के मरला सँ क्रोधित भय नाग–नागिन एक दिन ब्राह्मण के श्राप देलखिन जे “जेना अहाँ हमार बच्चा सब के मारलहुँ तहिना अहाँ के वंश के सबटा बच्चा सब साँप के कटला सँ मरि जायत।" समयांतराल में ब्राह्मणक बड़का बेटा केँ हर्षोल्लास सँ विवाह भेलनि। विवाहोपरांत ब्राह्मण बेटा कनियाक द्विरागमन करा अपना घर दिश विदा भेला। रास्ता मे किछ देरक वास्ते सुस्तेवा लेल एक टा वट वृक्षक नीचा मे दुनू बर कनिया बैसलाह। ओहि गाछ के जइड़ मे एकटा धोधैर छल जाहिमे नाग-नागिन रहइत छलईथ। नाग-नागिन धोधैर सँ निकलि दुनू बर कनिया के डैँस लेलखिन जाहि सँ दुनू के मृत्यु भय गेल I ब्राह्मणक घर मे दुःखक पहाड़ टूटि पड़ल I अहिना कय कऽ ब्राहमणक छ्हो पुत्र केँ एक-एक करि कऽ सर्प-दोष सँ मृत्यु भय गेलनि I ब्राह्मण–ब्राह्मणि चिंतित रहय लगला आ अपन छोटका बेटा के हमेशा अपना आँखि के सामने रखैत छलैथ I बेटा के हमेशा झांपि-तोपि के रखैत छलैथ कि कतहुँ साँप–बिच्छु नञ काटि लई I ब्राह्मणक बेटा जखन पैघ भेला त धनोपार्जन हेतु घर सँ बाहर जेबाक लेल जिद्द करय लगला। पहिने त हुनकर माता-पिता हुनका बाहर भेजवा लेल तैयार नई होईत छला, फेर एही शर्त पर राजी भेला कि हमेशा अपना संगे एकटा छाता और जूता रखता। शर्त मानि ब्राह्मण बेटा घर सँ बिदा भेला।
जाईत-जाईत एकटा गाम लग पहुँचला, गाम के बाहर एकटा धार छल, ब्राह्मण बेटा जूता पहिर लेलथि आ धार के पार करय लगला। तखने गामक किछु लड़की सभहक झुण्ड सेहो धार पार करैत छली। सखी सब ब्राह्मणक बेटा केँ जुत्ता पहिर पानि मे जाईत देखि ठठहा कऽ हँसय लगली आ कहय लगली कि – “हे देखू सखि सब केहन बुरबक छै ई ब्राह्मणक बेटा, पानि मे जूता पहिरने अईछ।" ओहि झुण्ड मे एकटा सामा धोबिन के बेटी सेहो छल से सखि सबके अपन तर्क देलखिन जे –"हे सखि! नई बुझलौं, ब्राह्मण बेटा पानी मे जूता एही दुआरे पहिरने अछि जाहि सँ पानि मे रहय बला साँप–कीड़ा ओकरा पैर मे नइ काटि लइ।” ब्राह्मण बेटा ओहि लङकी के तर्क सुनि चकित भेला। धार पार कय सब गोटा आगु बढ़ल, धुप बेसी छल मुदा ब्राह्मण बेटा छाता अपना कांख तर दबने रहल, सब सखि सब मुँह झांपि मुस्कुराइत रहली आ सोचैत छलि, जे एतेक धुप छै आ ई मानुष छत्ता कांख तर दबैने अछि। बर रौउद छल आ गाम क उबर-खाबड़ मैइटक रस्ता, सब गोटा चलैत-चलैत थाईक गेली। रस्ता कात मे एकटा बरका विशाल बड़क गाछ छल जकरा देख सब गोटा ओहि छाया मे विश्राम करवा हेतु गाछ तर बैस रहल। ब्राह्मण बेटा जखने गाछ तर बैसला अपन कांखि तर दबल छत्ता खोइल ताइन लेलइथ। सब सखि सब फेर जोर सँ हंस लागलि आ कह लागलि जे –“देखिअऊ इ मानुष के धूप छल त छत्ता कांख तर देवेने छल आ जखन गाछ तर छाया मे बैसल अछि तऽ छत्ता तनने अछि।" सामा धोबिनक बेटी जे ब्राह्मण बेटा के बेर-बेर ध्यान सँ देखि रहल छलैथ, फेर अपन तर्क देलखिन जे –“हे सखि सब! अहाँ सब फेर नई बुझलौं, ई ब्राह्मण बेटा गाछ पर रहै बला साँप-कीड़ा सँ अपना के बचबै लेल गाछ तर छत्ता तनने अछि।" ब्राह्मण क बेटा जे बरी काल सँ सामा बेटी के तर्क सुनैत छला, ओकर बात सँ ततेक प्रभावित भेला कि सोचलैथ कि अगर विवाह करब त एही चतुर कन्या सँ करब। ब्राह्मण बेटा गामक धोबिन लग गेला आ धोबिन सामा सँ कहलखिन जे हम आहाँक चतुर बेटी सँ विवाह कर चाहैत छी। सामा धोबिन तैयार भय गेलि आ खुशी–खुशी दुनू के विवाह कय देलखिन। जखन बिदागरीक समय आयल त सामा धोबिन कहलखिन जे –“हे बेटी हम त गरीब छी, हमरा लग धन-दौलत किछु नहि अछि, अहाँ के हम बिदागरी में की दिय ?” सामाक बेटी ताहि पर उत्तर में कहलखिन जे –“हे माय! अहाँ हमरा किछु नञ मात्र कनी धानक लाबा, कनी दूध, बोहनी आ एक टा बियन दिय आ आशीर्वाद दिय जे हम अपना पति आ हुनकर वंश वृद्धि मे सहायक होइयन।” सामा धोबिन सब चीज जे हुनकर बेटी कहलकैन ओरिआन कय क देलखिन आ आशीर्वाद दय दुनू बर कनियाँ के विदा केलखिन। ब्राह्मण बेटा अपन कनिया के लय अपना गाम दिश चल लगला। चलैत-चलैत जखन दुनू गोटा थाईक गेला त विश्राम करवा लेल एक टा बड़क गाछ के नीचा मे रुकि गेला। सामा धोबिनक बेटी अपन माय क देल सबटा समान गाछ के निचा मे राखि अपना वर संगे आराम करय लगलि। ओही बड़क वृक्ष के जइड़ मे एकटा नाग-नागिन बिल में संगे रहैत छल। गाछ के जइड़ लग दूध, लाबा आ बोहनी मे राखल पानि देखि नाग कय भूख और प्यास जागृत भय गेल आ नाग अपना बिल सँ निकलि बाहर जयबाक लेल व्यग्र भ गेला। नागिन बेर-बेर मना कर लागलैथ किन्तु नाग नइ मानलैथ आ बाहर आबि जहिना बोहनी में राखल पानि के पिबा लेल ओहि में मुहँ देलखिन, धोबिन बेटी नाग समेत बोहनी के हाथ सँ पकड़ि अपना जाँघ तर मे दाबि कऽ राखि लेलैथ। नाग कतबो प्रयास केलैथ निकलि नहि पयलैथ। जखन बरि काल बितलाक बादो नाग घुरि क नहि अयलाह त नागिन बाहर निकललि आ देखलखिन जे नाग के त एकटा नव कनियाँ पकड़ने अछि। नागिन ओकरा सँ कहलखिन कि नाग के छोड़ि दिअऊ, परन्तु सामा बेटी नहि मानलखिन। नागिन के निरंतर अनुनय–विनय के बाद धोबिन बेटी एकटा शर्त राखलखिन जे –“हे नागिन हम अहाँ के पति नाग राज के तखने छोड़बनि जखन अहाँ हमरा पति आ हुनकर वंश के सर्प-दोष सँ मुक्त करब संगहि हुनकर छबो भाई के जे मरि गेल छैथ केँ पुनः जीवित करब।" नागिन विवश छली धोबिन बेटी के शर्त मानवा लेल। नागिन स्वर्ग सँ अमृत अनलेइथ आ ब्राह्मण के सबटा पुत्र सहित पुत्रवधु के जीवित कय सर्प–दोष सँ मुक्त कय सब के आशीर्वाद देलखिन। तखन जा कऽ धोबिन बेटी नाग के छोड़लखिन और अपन करनी लेल क्षमा माँगि नाग-नागिन के प्रणाम केलैथ। तखन नाग नागिन ब्राह्मण के सबटा पुत्र आ पुत्रबधु सबके आशीर्वाद दैत कहलखिन –“जेष्ठ मास के अमावश्या दिन विवाहित कनिया सब ज्यों बड़ के गाछ के पूजा करती आ बिष-विषहारा केँ दूध लाबा चढ़ा हुनकर पूजा करती तँ हुनकर सब के सुहाग अखण्ड रहतैन।"
नाग–नागिन सँ आशीर्वाद लय ब्राह्मणक सातो पुत्र आ' सातो कनिया जखन अपना घर पहुँचला त ब्राह्मण-ब्राह्मणि के प्रसन्ताक नई तऽ कुनु ओर रहलनि नञ छोड़ आ दुनू गोटा धोबिन सामा के बेटी के बहुत बहुत आशीर्वाद देलखिन। ओकरा बाद सब गोटा प्रसन्ता पूर्वक रहय लगला।
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*मिथिला संस्कृति सँ साभार*
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