31/08/2026
अलविदा साथी…😭💔तेरा सफर अब किसी और शहर में होगा, लेकिन तेरी यादें हमेशा सुंदरनगर की सड़कों पर चलती रहेंगी। आज सुंदरनगर डिपो के लिए सिर्फ एक बस विदा नहीं हुई… आज एक ऐसा साथी चला गया, जो वर्षों से हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। बस को पता भी नहीं कि वो विदा हो रही है, लेकिन पीछे छोड़ जाने वाले लोगों को सब पता है। 😭
कितनी सुबहें इसकी आवाज़ के साथ शुरू हुई होंगी… कितने लोग इसे पकड़ने के लिए दौड़े होंगे… कितने कर्मचारी रोज़ इसी बस के साथ अपनी ड्यूटी पर निकले होंगे… कितने विद्यार्थियों ने इसकी सीटों पर बैठकर अपने भविष्य के सपने देखे होंगे… और कितने परिवारों को इसने सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाया होगा। शायद बस कभी बोल नहीं सकती, लेकिन अगर बोल पाती तो सुंदरनगर की हर गली की अपनी एक कहानी सुनाती। 💔
आज वही बस सुंदरनगर को छोड़कर किसी और डिपो की ओर चली गई। जाते हुए शायद उसे पता भी नहीं होगा कि पीछे कितनी आंखें नम हैं और कितने लोग चुपचाप उसे जाते हुए देख रहे हैं। कोई इसे सिर्फ HRTC की एक बस कहेगा, लेकिन जिसने वर्षों तक इससे सफर किया है, उसके लिए यह लोहे की बनी कोई मशीन नहीं… यादों का एक चलता-फिरता हिस्सा है।
पहले इंसानों का स्थानांतरण होता था… अब HRTC में बसों का भी स्थानांतरण होने लगा है। इंसान तो नई जगह जाकर नए लोगों से मिल लेता है, लेकिन पुरानी बस जब चली जाती है तो उसकी जगह आने वाली नई बस कभी भी पुरानी यादों को पूरी तरह नहीं भर पाती। 🥺 कभी इसी बस का इंतज़ार घंटों किया होगा, कभी इसी में खिड़की वाली सीट के लिए जगह बनाई होगी, कभी बारिश में इसकी छत के नीचे बैठकर घर पहुंचने की खुशी हुई होगी… और आज वही बस बिना कुछ कहे हमसे दूर चली गई।🥹
सुंदरनगर की सड़कों पर इसकी आवाज़ शायद अब सुनाई न दे, लेकिन इसकी यादें बहुत लंबे समय तक यहां की हवाओं में सुनाई देती रहेंगी। बसें आती-जाती रहेंगी… डिपो बदलते रहेंगे… रूट बदलते रहेंगे… लेकिन कुछ बसें ऐसी होती हैं जिन्हें विदा करना सिर्फ एक वाहन को विदा करना नहीं होता। उन्हें विदा करते वक्त ऐसा लगता है जैसे अपनी जिंदगी का एक छोटा सा हिस्सा भी हमारे हाथों से निकलकर दूर जा रहा हो। 😭💔