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28/05/2026

चोल देश के दिव्य देशम - भाग 15 | तिरुच्चिरु पुलियुर - श्री कृपासमुद्र पेरुमल मंदिर (तमिलनाडु)
108 दिव्य देशमों की पावन श्रृंखला में आज हम दर्शन करेंगे चोल नाडु के एक अत्यंत अनोखे और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध मंदिर—तिरुच्चिरु पुलियुर (Sri Kripasamudra Perumal Temple, Thiruchiru Puliyur) के। यह पवित्र स्थल कई अद्भुत और अनसुनी पौराणिक कथाओं को समेटे हुए है, जो भक्तों को भगवान विष्णु की असीम अनुकंपा का अहसास कराती हैं।

इस वीडियो की मुख्य विशेषताएं:

ऋषि व्याघ्रपाद की कथा: चिदंबरम में भगवान शिव का दिव्य नृत्य देखने वाले व्याघ्रपाद ऋषि भगवान विष्णु के श्रीरंगम वाले रंगनाथ रूप को भी देखने की इच्छा रखते थे। आँखों की रोशनी कम होने के कारण वे रास्ता भटक कर यहाँ पहुँच गए।

भगवान का बाल रूप: यहाँ के छोटे पेरुमल को देखकर ऋषि नाराज हो गए। तब पेरुमल ने मुस्कुराते हुए उन्हें यह समझाने के लिए कि वे और रंगनाथ एक ही हैं, एक छोटे बालक का रूप धारण किया और यहाँ शयन मुद्रा में विराजमान हो गए।

कृपासमुद्र पेरुमल की महिमा: भगवान का नाम 'कृपासमुद्र पेरुमल' है, जिसका अर्थ है करुणा का सागर। आपके जीवन में कैसी भी मानसिक परेशानी या कष्ट हो, यहाँ आकर इस छोटे बालक के रूप में भगवान के दर्शन करने से सभी चिंताएं दूर हो जाती हैं।

राहु-केतु दोष से मुक्ति: ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों को राहु-केतु दोष या सर्प दोष है, वे यहाँ आकर प्रार्थना करें तो उन्हें शीघ्र ही इन दोषों से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है।

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क्या आप भी 108 दिव्य देशम यात्रा, 276 शिवालय यात्रा या भारत के प्रसिद्ध तीर्थस्थलों की यात्रा को पूर्णता के साथ अनुभव करना चाहते हैं? 27 से अधिक वर्षों के अटूट विश्वास के साथ रेन्गा हॉलिडेज एंड टूरिज्म आपकी यात्रा को सुगम, सुरक्षित और आनंदमय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है。

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28/05/2026

चोल देश के दिव्य देशम - भाग 14 | तिरुवालूर श्री वामनन पेरुमाळ मंदिर (तमिलनाडु) 🤩
108 दिव्य देशमों की पावन श्रृंखला में आज हम दर्शन करेंगे चोल नाडु के एक अत्यंत अनोखे और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध मंदिर—तिरुवालूर (Sri Vamanan Perumal Temple, Thirualoor) के। यह पवित्र स्थल कई अद्भुत और अनसुनी पौराणिक कथाओं को समेटे हुए है, जो भक्तों को भगवान विष्णु की असीम अनुकंपा का अहसास कराती हैं।

इस वीडियो की मुख्य विशेषताएं:

श्री कृष्ण रूपी वामन अवतार: वामन अवतार में भगवान आमतौर पर हाथ में छाता लिए नजर आते हैं, लेकिन यहाँ विराजमान पेरुमाळ वैसे ही रूप में खड़े हैं जैसे वृंदावन में श्री कृष्ण गाय चराते थे। उनके हाथ में एक लाठी है, जो भक्तों के अहंकार को शांत करती है।

संतान सुख का वरदान: यद्यपि यहाँ के पेरुमाळ को वामनन कहा जाता है, लेकिन वे एक छोटे बच्चे के रूप में यहाँ विराजमान हैं। यही कारण है कि यह एक गहरा विश्वास है कि जिन दम्पतियों को संतान सुख नहीं मिला है, वे यहाँ आकर प्रार्थना करें तो उन्हें शीघ्र ही संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।

राजा महाबली की मोक्ष स्थली: हम सब जानते हैं कि वामन अवतार में पेरुमाळ ने राजा महाबली को पाताल लोक भेज दिया था, लेकिन उस महाबली चक्रवर्ती को मोक्ष इसी तिरुवालूर में प्राप्त हुआ था। यह स्थान यह दर्शाता है कि यदि कोई पूरी तरह से उनकी शरण में आ जाए, तो पेरुमाळ उसे क्षमा कर देते हैं।

नकारात्मकता से मुक्ति: यदि आप अपने आसपास की बुरी नजर, ईर्ष्या और नकारात्मकता से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो एक बार इस वामन पेरुमाळ के दर्शन अवश्य करें।

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26/05/2026

चोल देश के दिव्य देशम - भाग 13 | तिरुच्चेराई श्री सारनाथ पेरुमाळ मंदिर (तमिलनाडु)
108 दिव्य देशमों की पावन श्रृंखला में आज हम दर्शन करेंगे चोल नाडु के एक अत्यंत अनोखे और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध मंदिर—तिरुच्चेराई (Sri Saranatha Perumal Temple, Thirucherai) के।

यह पवित्र स्थल कई अद्भुत और अनसुनी पौराणिक कथाओं को समेटे हुए है, जो भक्तों को भगवान विष्णु की असीम अनुकंपा का अहसास कराती हैं।

इस वीडियो की मुख्य विशेषताएं:

कावेरी माता को मिला अनोखा सौभाग्य: जानिए कैसे गंगा और कावेरी नदी के बीच श्रेष्ठता की प्रतिस्पर्धा के बाद, कावेरी माता की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान पेरुमाळ ने उन्हें अपनी गोद में एक नन्हीं बच्ची के रूप में बैठने का दिव्य सौभाग्य दिया। यह अद्भुत दृश्य तमिलनाडु के किसी अन्य दिव्य देशम में देखने को नहीं मिलता।

ब्रह्मा जी और तिरुच्चेराई की मिट्टी का रहस्य: जब सृष्टि के पुनर्निर्माण के लिए ब्रह्मा जी को एक बेहद सुदृढ़ कलश बनाने के लिए मिट्टी की आवश्यकता थी, तब उन्हें पूरे ब्रह्मांड में केवल इसी तिरुच्चेराई गांव की पवित्र मिट्टी सबसे सुदृढ़ मिली, जिसमें भगवान पेरुमाळ का 'सार' समाहित था। इसी कारण इस धाम का नाम 'सारनाथ' पड़ा।

सप्तऋषियों की दोषमुक्ति: पूरे भारत का भ्रमण करने के बाद, जैसे ही सप्तऋषियों ने तिरुच्चेराई की पावन मिट्टी को छुआ, उनका मन और शरीर पूरी तरह से शुद्ध और दोषमुक्त हो गया।

कुबेर देव की खोई हुई संपत्ति की प्राप्ति: जब कुबेर देव ने अपनी प्रसिद्ध शंखनिधि और पद्मनिधि खो दी थी, तब उन्होंने इसी सारनाथ पेरुमाळ की आराधना करके अपनी खोई हुई समृद्धि वापस पाई थी। इसी वजह से इस स्थान को "निधितिरुथलम" भी कहा जाता है।

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25/05/2026

चोल देश के दिव्य देशम - भाग 12 | नाथन कोविल - श्री जगन्नाथ पेरुमाळ मंदिर (तमिलनाडु)
108 दिव्य देशमों की पावन यात्रा में आज हम दर्शन करेंगे चोल नाडु के एक अत्यंत महिमामयी और जागृत मंदिर—नाथन कोविल (Nathan Kovil - Sri Jagannatha Perumal Temple) के।

यह पवित्र स्थल न केवल पौराणिक गाथाओं को समेटे हुए है, बल्कि इसे "दक्षिण जगन्नाथम" के रूप में भी पूजा जाता है। ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर का जितना महत्व है, उतना ही पूजनीय दक्षिण भारत का यह पावन धाम है।

इस वीडियो की मुख्य विशेषताएं:

नंदी भगवान की कठोर तपस्या: जानिए क्यों माता महालक्ष्मी के कोप और श्राप से मुक्ति पाने के लिए नंदी जी को यहाँ आकर तपस्या करनी पड़ी।

शंभकवल्ली माता की कथा: वह स्थान जहाँ स्वयं लक्ष्मी जी ने चंपक (चம்பা) के पेड़ के नीचे बैठकर तपस्या की थी, जिसके कारण उन्हें 'शंभकवल्ली' नाम मिला।

टूटे परिवारों को जोड़ने वाले प्रभु: यहाँ भगवान विष्णु का मुख पश्चिम दिशा की ओर है, जहाँ वे वैकुंठ से आने वाली माता लक्ष्मी का स्वागत कर रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि यहाँ श्रद्धापूर्वक की गई प्रार्थना से बिछड़े हुए परिवार फिर से एक हो जाते हैं।

नंदी पुष्करणी की महिमा: मंदिर का वह पवित्र तालाब जिसके बारे में मान्यता है कि यह नंदी भगवान के पश्चाताप के आंसुओं से निर्मित हुआ था। यहाँ शुक्रवार और पूर्णिमा के दिन दर्शन करने से भक्तों के सारे आर्थिक कष्ट दूर हो जाते हैं।

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25/05/2026

चोल देश के दिव्य देशम - भाग 11 | तिरुआदानूर श्री अंडलक्कुम अयन मंदिर (तमिलनाडु)
108 दिव्य देशमों की पावन श्रृंखला में आज हम दर्शन करेंगे चोल नाडु के एक अत्यंत चमत्कारी और ऐतिहासिक मंदिर—तिरुआदानूर (Sri Andallakkum Ayan Temple) के।

यह मंदिर भगवान विष्णु और उनके अनन्य भक्तों की अनूठी कथाओं को समेटे हुए है। यहाँ भगवान शयन मुद्रा में विराजमान हैं और उनके पास एक मरक्काल (अनाज मापने का बर्तन) रखा हुआ है, जो बिल्कुल किसी आधुनिक ऑडिट ऑफिसर की तरह दिखाई देता है।

इस वीडियो की मुख्य विशेषताएं:

चमत्कारी रेत की कथा: जानिए कैसे भगवान ने मंदिर निर्माण के समय ईमानदारी से मेहनत करने वाले श्रमिकों की रेत को सोने के सिक्कों में बदल दिया था।

अंडलक्कुम अयन: भगवान को यह नाम क्यों मिला और कैसे वे हमारे पाप-पुण्य के खातों का सटीक हिसाब रखते हैं।

श्री राम और विष्णु का एक रूप: यहाँ भगवान श्री राम चार भुजाओं में शंख, चक्र, धनुष और बाण धारण कर साक्षात विष्णु रूप में दर्शन देते हैं, जो यह दर्शाता है कि राम और विष्णु एक ही हैं।

जटायु तीर्थ की महिमा: वह पवित्र कुंड जहाँ पक्षीराज जटायु को मोक्ष देने के बाद प्रभु श्री राम ने स्वयं स्नान किया था।

कामधेनु का अहंकार भंग: देवलोक की गाय कामधेनु के यहाँ तपस्या करने और भगवान की कृपा प्राप्त करने की पौराणिक गाथा।

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22/05/2026

🕉️ कपिस्थलम - श्री गजेंद्र वरदराज पेरुमल मंदिर | चोल नाडू दिव्य देशम यात्रा (भाग-09) 🙏
108 दिव्य देशमों की पावन श्रृंखला में चोल नाडू का नौवां धाम है कपिस्थलम (Kapisthalam)। यह वही पवित्र स्थान है जहाँ भगवान विष्णु ने अपने परम भक्त 'गजेंद्र' (हाथी) की पुकार सुनकर उसे मोक्ष प्रदान किया था। इस वीडियो में हम इस ऐतिहासिक मंदिर की महिमा, पौराणिक कथाओं और इसके आध्यात्मिक महत्व को विस्तार से जानेंगे।

वीडियो की मुख्य विशेषताएं:
गजेंद्र मोक्ष की पावन कथा: पौराणिक कथा के अनुसार, जब गजेंद्र नाम के एक हाथी का पैर नदी में एक मगरमच्छ ने पकड़ लिया था, तब 1000 वर्षों तक चले उस कड़े संघर्ष को समाप्त करने के लिए भगवान पेरुमल स्वयं प्रकट हुए थे। उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ का वध कर गजेंद्र को मुक्ति दिलाई थी।

कपिस्थलम नाम का रहस्य: रामायण काल के महान वानर वीर बाली और सुग्रीव को भगवान पेरुमल ने इसी स्थान पर दर्शन दिए थे। चूंकि 'कपि' का अर्थ बंदर (वानर) होता है और हनुमान जी ने भी यहाँ आकर तपस्या की थी, इसीलिए इस पावन स्थल का नाम 'कपिस्थलम' पड़ा।

भुजंग शयन मुद्रा: यहाँ भगवान पेरुमल आदि शेष (शेषनाग) पर पूर्व की ओर मुख करके 'भुजंग शयन' मुद्रा (विश्राम अवस्था) में विराजमान हैं।

ग्रह दोष और शत्रुओं से मुक्ति: भक्तों का यह दृढ़ विश्वास है कि यहाँ पूजा करने से शत्रुओं द्वारा पैदा की गई बाधाएं दूर होती हैं, राहु-केतु और चंद्र दोषों से मुक्ति मिलती है और खोया हुआ पद-प्रतिष्ठा वापस मिल जाता है।

आलवार संतों का मंगालाशासन: महान संत तिरुमैलिसई आलवार ने जिन पांच विशेष स्थलों पर "हे पेरुमल! जागिए" गाकर प्रभु की स्तुति की थी, उनमें से यह मंदिर भी एक है।

चोल नाडू की इस परम पावन आध्यात्मिक यात्रा के अगले भाग में हम 10-वें दिव्य देशम के बारे में जानेंगे।

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21/05/2026

🕉️ तिरुक्कुडलूर - श्री वैयाम कात्त पेरुमल मंदिर | चोल नाडू दिव्य देशम यात्रा (भाग-08) 🙏
108 दिव्य देशमों की पावन श्रृंखला में चोल नाडू का आठवां और अत्यंत चमत्कारी धाम है तिरुक्कुडलूर (Thirukkudalur), जिसे 'आदतुराई' (Aduthurai) के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर कावेरी नदी के तट पर स्थित है। इस वीडियो में हम इस पवित्र मंदिर की महिमा, पौराणिक कथाओं और इसके अनोखे रहस्यों को गहराई से जानेंगे।

वीडियो की मुख्य विशेषताएं:
जटायु का अंतिम संस्कार: रामायण काल से जुड़ी मान्यता के अनुसार, माता सीता की खोज में आए भगवान श्री राम ने घायल होकर गिरे पक्षीराज जटायु का अंतिम संस्कार इसी स्थान पर किया था और उन्हें मोक्ष प्रदान किया था। इसी कारण यहाँ स्थित पवित्र जल कुंड को 'जटायु तीर्थ' कहा जाता है।

देवताओं का संगम (कुडलूर): प्रलय काल के दौरान दुनिया को विनाश से बचाने के लिए सभी देवी-देवता एक साथ इकट्ठे होकर भगवान विष्णु की प्रार्थना करने इसी स्थान पर आए थे। चूंकि सब यहाँ एकत्र (Gather) हुए थे, इसीलिए इस स्थान का नाम 'कुडलूर' पड़ा।

श्री वैयाम कात्त पेरुमल: यहाँ विराजमान भगवान विष्णु का नाम 'वैयाम कात्त पेरुमल' (Vaiyam Kaatha Perumal) है, जिसका अर्थ है—"संसार की रक्षा करने वाले भगवान"।

राजा अम्बरीष और एकादशी व्रत: चक्रवर्ती राजा अम्बरीष ने अपनी एकादशी व्रत का समापन इसी पावन भूमि पर किया था। यहीं पर भगवान पेरुमल ने अपने भक्त की रक्षा के लिए महर्षि दुर्वासा के अहंकार को नष्ट किया था।

आदतुराई का रहस्य: प्राचीन समय में इस क्षेत्र में घना जंगल हुआ करता था, जहाँ बकरियों (तमिल में 'आडु') ने तपस्या की थी, इसीलिए इस स्थान को 'आदतुराई' भी कहा जाता है।

108 दिव्य देशमों में हर एक पत्थर अपनी एक कहानी बयान करता है। चोल नाडू की इस परम पावन आध्यात्मिक यात्रा के अगले भाग में हम 9-वें दिव्य देशम के बारे में जानेंगे।

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19/05/2026

🕉️ तिरुप्पेरनगर (कोवलडी) - श्री अप्पकुडत्तान पेरुमल मंदिर | चोल नाडू दिव्य देशम (भाग-06) 🙏
108 दिव्य देशमों की पावन श्रृंखला में चोल नाडू का छठा और अत्यंत ऐतिहासिक धाम है तिरुप्पेरनगर, जिसे 'कोवलडी' के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर कावेरी और कोलिदाम नदी के बीच स्थित है। इस वीडियो में हम इस पावन स्थल के अद्भुत इतिहास और चमत्कारों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

वीडियो की मुख्य विशेषताएं:
अपराध और भूख मिटाने की कथा: पौराणिक कथा के अनुसार, उपमन्यु महर्षि की भूख और क्रोध को शांत करने के लिए भगवान विष्णु यहाँ स्वयं प्रकट हुए थे और उन्होंने ऋषि को एक घड़ा भरकर घी के 'अप्पम' (एक प्रकार का मीठा व्यंजन) भेंट किए थे।

गर्भगृह में अप्पम का घड़ा: इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आज भी मुख्य गर्भगृह में भगवान अप्पकुडत्तान के दाहिने हाथ के नीचे वह 'अप्पम का घड़ा' देखा जा सकता है।

शयन मुद्रा (लेटी हुई प्रतिमा): आम तौर पर भगवान विष्णु पूर्व या पश्चिम की ओर मुख करके शयन मुद्रा में होते हैं, लेकिन यहाँ वे कावेरी नदी के तट पर एक विशेष आनंदमयी शयन मुद्रा में भक्तों को दर्शन देते हैं।

खोया हुआ मान-सम्मान वापस पाने का स्थान: मान्यता है कि जब देवराज इंद्र ने अपना अहंकार खो दिया और असुरों से पराजित हो गए, तब उन्होंने इसी स्थान पर आकर तपस्या की और अपनी खोई हुई शक्तियां व मान-सम्मान वापस पाया। इसलिए जीवन में मान-प्रतिष्ठा वापस पाने के लिए यहाँ दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

नम्माळवार का अंतिम पाशुर: महान संत नम्माळवार ने वैकुंठ जाने से पहले अपने जीवन के अंतिम पाशुर (भक्ति पद) इसी मंदिर के भगवान अप्पाल रंगनाथर को समर्पित किए थे।

चोल नाडू की इस पावन आध्यात्मिक यात्रा के अगले भाग में हम 7-वें दिव्य देशम के बारे में जानेंगे।

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18/05/2026

🕉️ तिरुअन्बिल - श्री सुंदरराज पेरुमल मंदिर | चोल नाडू दिव्य देशम यात्रा (भाग-05) 🙏
108 दिव्य देशमों की पावन श्रृंखला में चोल नाडू का पांचवां महत्वपूर्ण धाम है तिरुअन्बिल (Thiru Anbil)। यह मंदिर कोलिदाम (Kollidam) नदी के उत्तरी तट पर स्थित है और अपने शांत वातावरण व गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। इस वीडियो में हम इस प्राचीन मंदिर के रहस्यों और इसकी आध्यात्मिक महिमा के बारे में जानेंगे।

वीडियो की मुख्य विशेषताएं:
ब्रह्मा जी और वाल्मीकि जी की तपस्थली: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी ने अपनी सुंदरता वापस पाने के लिए और महर्षि वाल्मीकि जी ने घोर तपस्या के बाद भगवान के दर्शन इसी स्थान पर प्राप्त किए थे।

श्री सुंदरराज पेरुमल: यहाँ भगवान विष्णु 'सुंदरराज' के रूप में विराजमान हैं, जिन्हें 'वडिवलगिया नम्बी' (अत्यंत सुंदर प्रभु) भी कहा जाता है। प्रभु यहाँ आदि शेष पर शयन मुद्रा (पल्ली कोंडा कोलम) में भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।

अन्बिल का अर्थ: तमिल में 'अन्बु' (Anbu) का अर्थ 'प्रेम' होता है। भगवान ने अपने भक्तों के प्रति जो अपार प्रेम यहाँ प्रदर्शित किया, उसी के कारण इस स्थान का नाम 'तिरुअन्बिल' पड़ा।

ऐतिहासिक महत्व: यह मंदिर महान चोल राजाओं के काल की वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण है और वैष्णव परंपरा में इसका एक विशेष स्थान है।

इस आध्यात्मिक यात्रा के अगले भाग में हम चोल नाडू के छठे दिव्य देशम के बारे में विस्तार से जानेंगे।

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16/05/2026

🕉️ तिरुक्करंबनूर - श्री पुरुषोत्तम पेरुमल मंदिर | चोल नाडू दिव्य देशम यात्रा (भाग-03) 🙏
108 दिव्य देशमों की पावन श्रृंखला में चोल नाडू का तीसरा महत्वपूर्ण और अत्यंत दुर्लभ धाम है तिरुक्करंबनूर (Thirukkarambanur), जिसे 'उत्तंमर कोइल' के नाम से भी जाना जाता है। इस वीडियो में हम इस अनूठे मंदिर के इतिहास, चमत्कारों और इसके आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानेंगे।

वीडियो की मुख्य विशेषताएं:
त्रिमूर्ति और उनकी देवियों का संगम: यह दुनिया का एक अत्यंत दुर्लभ स्थान है जहाँ ब्रह्मा, विष्णु और शिव के साथ उनकी देवियों—सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती—के एक ही स्थान पर दर्शन प्राप्त होते हैं।

पुरुषोत्तम पेरुमल: 108 दिव्य देशमों में केवल इसी मंदिर में भगवान विष्णु 'पुरुषोत्तम' नाम से विराजमान हैं।

ब्रह्म हत्या दोष से मुक्ति: पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव के हाथ से चिपका हुआ ब्रह्मा जी का कपाल इसी स्थान पर देवी 'पूर्णवल्ली थयार' द्वारा दी गई भिक्षा से अलग हुआ था, जिससे शिव जी को ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति मिली।

श्रीरंगम मंदिर के निर्माण में सहायता: मान्यता है कि जब श्री रंगनाथस्वामी मंदिर के निर्माण के दौरान धन की कमी हुई, तब भगवान रंगनाथ के आदेश पर चोल राजा ने इसी मंदिर के कदम्ब वृक्ष के नीचे से स्वर्ण निकालकर निर्माण कार्य पूरा किया था।

भक्ति और ज्ञान का केंद्र: यह पावन स्थल न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है बल्कि भक्ति और ज्ञान के बीच एक सेतु का कार्य भी करता है।

इस आध्यात्मिक यात्रा के अगले भाग में हम चोल नाडू के चौथे दिव्य देशम के बारे में जानेंगे।

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16/05/2026

🕉️ उरैयुर - श्री अलगिया नांबी पेरुमल मंदिर | चोल नाडू दिव्य देशम यात्रा (भाग-02) 🙏
108 दिव्य देशमों की पावन श्रृंखला में चोल नाडू का दूसरा महत्वपूर्ण धाम है उरैयुर (Uraiyur), जिसे 'कोझियूर' के नाम से भी जाना जाता है। इस वीडियो में हम इस प्राचीन मंदिर के अद्भुत इतिहास, वीरता की कहानियों और इसके आध्यात्मिक महत्व के बारे में जानेंगे।

वीडियो की मुख्य विशेषताएं:
वीरता का प्रतीक (कोझियूर): इस स्थान का नाम 'कोझियूर' इसलिए पड़ा क्योंकि यहाँ एक साधारण मुर्गे (Rooster) ने अपनी शक्ति और साहस से एक विशाल हाथी को युद्ध में परास्त कर दिया था। यह घटना भक्ति और आत्मविश्वास की शक्ति को दर्शाती है।

कमलवल्ली थयार का प्राकट्य: यह वह पवित्र स्थान है जहाँ देवी लक्ष्मी ने 'कमलवल्ली' के रूप में अवतार लिया था। यहाँ भगवान विष्णु (श्री रंगनाथ) और कमलवल्ली थयार के दिव्य विवाह की कथा प्रचलित है।

तिरुप्पन आलवार का जन्मस्थान: 12 आलवार संतों में से एक, परम भक्त तिरुप्पन आलवार का जन्म इसी पावन नगरी उरैयुर में हुआ था।

एकमात्र मंदिर जहाँ उत्सव मूर्ति नहीं है: इस मंदिर की एक अनूठी विशेषता यह है कि यहाँ भगवान की कोई अलग 'उत्सव मूर्ति' (Processional Deity) नहीं है। श्रीरंगम के भगवान रंगनाथ ही यहाँ उत्सवों के लिए पधारते हैं।

इस आध्यात्मिक यात्रा के अगले भाग में हम चोल नाडू के तीसरे दिव्य देशम के बारे में विस्तार से जानेंगे।

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