29/11/2025
ज़िंदगी अब सेटल सी होने लगी है
वो बेवजह की भाग-दौड़, बेमतलब की चिंताएं अब पीछे छूटने लगी हैं
अब गुस्सा नहीं आता, लड़ाई के बजाय समझाने का मन करता है
उकसाने के बजाय एक्सप्लेन करने लगे हैं—धीरे-धीरे शायद समझ आ गया है कि हर किसी को एक लेंथ की बॉल नहीं फेंकनी..
सब्जियां अब ज़्यादा अच्छी लगने लगी हैं..
हर स्वाद, हर रंग जैसे ज़िंदगी की सादगी और गहराई को समझाता हो..
नौकरी में अब तनाव कम है, काम में सुकून तलाशने लगे हैं..
दोस्ती जितनी भी बची है अब और गहरी और भी सच्ची होने लगी है..
और जिनसे तालमेल नहीं होता,
उन्हें धीरे-धीरे विदा करने का हुनर भी आ ही गया है..
जिनकी मदद कर सकते हैं, उनकी करते हैं
लेकिन अब अपनी सीमाएं भी पहचानने लगे हैं..
हर कोई खुश नहीं हो सकता, और हर काम आपके हिस्से का नहीं होता ये जिंदगी अब सिखा ही चुकी है..
जिम्मेदारी अब बोझ नहीं लगती, बल्कि खुद की दुनिया को बेहतर बनाने का एक हिस्सा बन गई है..
दुनियादारी में अब थोड़ा दिमाग और थोड़ा दिल लगाते हैं..
भावुकता और व्यवहारिकता का संतुलन बनाना सीख लिया है
हर बहस अब ज़रूरी नहीं लगती
खुद को संभालना ही ज़िंदगी का सबसे बड़ा काम समझ आने लगा है..
कुल मिलाकर फाइनल रिपोर्ट दें तो
ज़िंदगी आसान तो नहीं, पर जैसी भी है खूबसूरत जरूर लगने लगी है ❤️
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