Al Akhtar Tours & Travels

Al Akhtar Tours & Travels At Al Akhtar Tours & Travels, we pride ourselves in providing most excellent services to all the Pilgrims and focusing only their comfort.

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29/12/2025

✨ Ramzan 2026 Umrah Package ✨
A blessed journey awaits you this Ramzan 🕋🌙
Perform Umrah with comfort, guidance & complete peace of mind with Al Akhtar Tours & Travels.
🔹 First 20 Days – ₹1,17,786/- only
🔹 Last 20 Days – ₹1,27,786/- only
🔹 38–42 Days – ₹1,67,786/- only
🏨 Makkah Hotel: 1200 mtr (Bus Service)
🏨 Madinah Hotel: 800 mtr (Walking Distance)
✅ Umrah Visa
✅ Return Air Ticket
✅ Star Hotels
✅ All Ziyarat by A.C. Bus
✅ 3-Time Meal (Buffet)
✅ Guided Ziyarat (Sunni Alim)
✅ Welcome Kit & Zam Zam
📞 Book now – Limited seats!
📲 8980 786 700 | 9274 518 786
🤍 We perform Umrah ourselves – we don’t share passengers with other agencies.
Makkah Madinah RamzanSpecial

✨ UMRAH VISA AVAILABLE ✨Individual & Group | Fast & Hassle-FreePlanning for Umrah? Let us take care of your visa! 🕋✈️✔️ ...
29/12/2025

✨ UMRAH VISA AVAILABLE ✨
Individual & Group | Fast & Hassle-Free
Planning for Umrah? Let us take care of your visa! 🕋✈️
✔️ Processing in 24–48 Hours
✔️ No BRN Required
✔️ Simple Documents
✔️ Trusted & Experienced Service
📄 Required:
• Passport scan copy
• Travel details (Entry & Exit date)
📞 Contact:
📲 8980 786 700 | 9274 518 786
📍 Head Office: Vadodara
📧 [email protected]
AL AKHTAR TOURS & TRAVELS
Your journey, our responsibility 🤍
Madina HassleFreeVisa IslamicTravel

✨ A Powerful Moment in History ✨Over 11.9 million pilgrims were blessed to perform Umrah in Saudi Arabia in just one mon...
26/12/2025

✨ A Powerful Moment in History ✨
Over 11.9 million pilgrims were blessed to perform Umrah in Saudi Arabia in just one month 🤍
A true reflection of Allah’s mercy, unity of the Ummah, and the unmatched spiritual pull of the Holy Haram 🕋
Every step around the Kaaba carries a dua, every tear tells a story, and every heart longs to return again.
May Allah invite us all soon and accept the Umrah of every pilgrim. Ameen 🤲

Plan your blessed journey with trust & care
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Kaaba IslamicMoments AlAkhtarTours

✨ URS-E-SULTANUL HIND MUBARAK ✨🕋 A once-in-a-lifetime opportunity to perform Umrah on the blessed occasion of the 814th ...
26/12/2025

✨ URS-E-SULTANUL HIND MUBARAK ✨
🕋 A once-in-a-lifetime opportunity to perform Umrah on the blessed occasion of the 814th Urs of Sultanul Hind Khwaja Garib Nawaz (RA). 🤍
🌙 Special Umrah Offer
💰 Only ₹25,814/- per person
👥 Limited to 114 pilgrims only
📅 Booking Dates: 28 & 29 December 2025
⏰ 10:00 AM – 7:00 PM
📝 Book your seat by paying just ₹5,500 and get the form instantly.
✨ Package Includes:
✔️ Umrah Visa
✔️ Return Air Ticket
✔️ Star Hotel Stay
✔️ All Ziyarats by A/C Bus
✔️ 3-Time Meal Buffet
✔️ Ziyarat Guide (Sunni Alim)
✔️ Welcome Kit & Zam Zam
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📞 8980786700 | 9274518786 | 8530955786
🕌 Those who truly wish to perform Umrah should not miss this blessed offer.
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✨ January 2026 Bagdad Ziyarat Package ✨🕋 Travel with AL AKHTAR TOURS & TRAVELS✈️ Bagdad Ziyarat – Jan 2026💰 Rs. 95,786/-...
24/12/2025

✨ January 2026 Bagdad Ziyarat Package ✨
🕋 Travel with AL AKHTAR TOURS & TRAVELS
✈️ Bagdad Ziyarat – Jan 2026
💰 Rs. 95,786/- per person
💳 Book now with just Rs. 25,000/-
🌟 Special Guidance:
Khalifa-e-Tajush Shariah, Qazi-e-Gujarat
Hazrat Allama Maulana Alhaj Saiyad Salim Bapu Qibla
(Will accompany the tour)
✅ Iraq Visa | Return Air Ticket | Star Hotel
✅ All Ziyarats by A.C Bus | Sunni Aalim Guidance
✅ 3 Times Meal Buffet | Welcome Kit
📞 8980 786 700 | 9274 518 786
📍 Vadodara
👉 Limited seats • Book now!

23/12/2025
मेरा एक तुर्की का दोस्त मदीना मुनव्वरा की मस्जिद-ए-नबवी के आँगन में खड़े होकर अपनी आँखों देखी घटना बताता हैमैं मस्जिद-ए-...
19/12/2025

मेरा एक तुर्की का दोस्त मदीना मुनव्वरा की मस्जिद-ए-नबवी के आँगन में खड़े होकर अपनी आँखों देखी घटना बताता है

मैं मस्जिद-ए-नबवी में खड़ा देख रहा था कि चार पुलिसवाले किसी का इंतज़ार कर रहे हैं। फिर एक शख्स नज़र आया तो पुलिसवालों ने दौड़कर उसे पकड़ लिया और उसके हाथ जकड़ दिए। 🕺

नौजवान ने कहा:
मुझे दुआ और तवस्सुल की इजाज़त दे दो।
मेरी बात सुन लो, मैं कोई भिखारी नहीं हूँ, न चोर हूँ।
फिर वह नौजवान चीखने लगा।
मैंने उसे देखा तो ऐसा लगा जैसे मैं उसे जानता हूँ।
मैं बताता हूँ कि मैंने उसे कैसे पहचाना।
दरअसल, मैंने उसे कितनी ही मरतबा बारगाह-ए-रसूल में रोते हुए देखा था। 🕌

यह एक अल्बानवी नौजवान था, जिसकी उम्र 35 या 36 साल के दरमियान थी, उसके सुनहरी बाल और हल्की सी दाढ़ी थी।

मैंने पुलिसवालों से कहा:
इसका कोई जुर्म नहीं है तो तुम इसके साथ ऐसा क्यों कर रहे हो?🕺

आखिर क्या इल्ज़ाम है इस पर?
उन्होंने कहा:
वह चला जा, पीछे हट, इस मामले में बोलने का तुझे कोई हक़ नहीं।🕺👮‍♂️

लेकिन मैंने फिर से कहा:
आखिर इसका तुम लोगों के साथ क्या मसला है?
क्या इसने कोई चोरी की है?🕺

उन्होंने कहा:
यह बंदा 6 साल से इधर मदीना शरीफ में रह रहा है, लेकिन इसका यह क़याम ग़ैर-क़ानूनी है।
हम इसे पकड़ कर वापस इसके मुल्क भेजना चाहते हैं, लेकिन यह हर बार एक ही चाल से भाग जाता है और जा कर रोज़ा-ए-रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम में पनाह ले लेता है। 🕌

हम इसे अंदर जा कर गिरफ़्तार नहीं करना चाहते थे।
मैंने पूछा:
तो अब इसके साथ क्या करोगे? 👮‍♂️

कहने लगे:
हम इसे पकड़ कर जहाज़ पर बिठाएँगे और वापस अल्बानिया भेज देंगे। 🇦🇱🕺

नौजवान मुसलसल रोए जा रहा था और कह रहा था:
क्या हो जाएगा अगर तुम मुझे छोड़ दोगे तो?
देखो, मैं कोई चोर नहीं हूँ🕺🇦🇱

मैं किसी से भीख नहीं माँगता
मैं तो इधर बस मुहब्बत-ए-रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम में रह रहा हूँ।
पुलिसवालों ने कहा: 👮‍♂️
नहीं, ऐसा जाइज़ नहीं है।

नौजवान ने कहा:
अच्छा, मुझे ज़रा आराम से रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से एक अर्ज़ कर लेने दो। 🕌🕺🇦🇱

फिर नौजवान ने अपना मुँह गुम्बद-ए-ख़िज़रा की तरफ कर लिया।
पुलिसवालों ने कहा: 👮‍♂️
चल कह, जो कहना है।

तो नौजवान ने गुम्बद-ए-ख़िज़रा की तरफ देखा और जो कुछ अरबी में कहा, मैं ने समझ लिया।

वह नौजवान कह रहा था:
या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम!
क्या हमारे दरमियान इत्तेफ़ाक़ नहीं हुआ था? 🕌

क्या मैंने अपने माँ-बाप को नहीं छोड़ा
क्या अपनी दुकान बंद कर के अपना घर-बार नहीं छोड़ा
और यह अहद कर के यहाँ नहीं आया था कि आप के जवार-ए-रहमत में रहा करूँगा?👮‍♂️🇦🇱

हुज़ूर! अब देख लीजिए
यह मुझे ऐसा करने से मना कर रहे हैं।
या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम!
या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम!
आप मदाख़लत क्यों नहीं फ़रमाते?
या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम!
आप मदाख़लत क्यों नहीं फ़रमाते?🕌

इतने में नौजवान बेहाल होने लगा तो पुलिसवालों ने ज़रा ढील दी और नौजवान नीचे गिर गया।
एक पुलिसवाले ने उसे ठोकर मारते हुए कहा:
ओ धोखेबाज़! उठ!
लेकिन नौजवान ने कोई रद्द-ए-अमल ज़ाहिर न किया।

मैंने पुलिसवालों से कहा:
यह नहीं भागेगा, तुम हम्माम से पानी लाओ और इसके चेहरे पर डालो।
लेकिन नौजवान कोई हरकत नहीं कर रहा था। 🕺

एक पुलिसवाले ने कहा:
इसे देखो तो सही, कहीं यह सचमुच मर ही न गया हो?
दूसरा पुलिसवाला कहने लगा:
इसे हमने कौन सी ऐसी ज़र्ब लगाई है, जिससे यह मर जाए?

फिर उन्होंने ऐम्बुलेंस को बुलाया।
वह इधर सामने वाले सात नंबर गेट से एक ऐम्बुलेंस ले आए।

उन्होंने नौजवान की शह-रग पर हाथ रख कर हरकत नोट की और नब्ज़ चेक की तो कहने लगे:
इसे तो मरे हुए 15 मिनट गुज़र चुके हैं!🕺🕌

अब पुलिसवाले जैसे मुजरिम हों, नीचे बैठ गए और रोने लगे।
वह मंज़र भी देखने वाला था।

उन में से एक तो अपने दोनों ज़ानूओं पर हाथ मारते हुए कहता था: 👮‍♂️🕺

हाय! हमारे हाथ क्यों न टूट गए
काश हमें मालूम होता कि इसे रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से इतनी शदीद मुहब्बत है!
हाय! हमारे हाथ क्यों न टूट गए!

उसके बाद ऐम्बुलेंस वालों ने उसे वहाँ से उठा लिया और जन्नतुल बक़ी की तरफ तजहीज़-ओ-तकफ़ीन वाले हिस्से में ले गए।👮‍♂️🕺

ग़ुस्ल के वक़्त मैं भी वहीं मौजूद था।
मैं उन्हें कहता था:
मुझे भी हाथ लगाने दो, मुझे भी इसकी चारपाई उठाने दो।

जब जनाज़ा तैयार हो कर नमाज़ के लिए जाने लगा तो पुलिसवालों ने मुझ से कहा:
हम ने जितना गुनाह उठाया है, बस उतना काफ़ी है।
इसे हमारे सिवा और कोई नहीं उठाएगा।
शायद इसी तरह हमें आख़िरत में कुछ रियायत मिल जाए।

मेरे सामने ही वह नौजवान बार-बार कह रहा था:
या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम! आप मदाख़लत क्यों नहीं फ़रमाते? 🕺🕌🇦🇱

देखा!
रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मदाख़लत फ़रमा दी और मलाकुल मौत ने अपना फ़रीज़ा अदा कर के उसे आप तक हमेशा के लिए पहुँचा दिया। 🕌🇦🇱

अल्लाह हमें भी अपने हबीब सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की वैसी ही मुहब्बत अता फ़रमाए, जैसी उस अल्बानवी नौजवान को अता फ़रमाई थी।
आमीन सुम्मा आमीन या रब्ब-उल-आलमीन! 😭🕺🇦🇱

नोट 👉 तकरीबन 8 महीने पहले का वाक्य

हुजरा जुवैरिया रज़ियल्लाहु तआला अन्हाजब बाबुन्निसा से मस्जिदे नबवी में क़दम रखा जाए तो दिल पर एक अजीब सी नरमी उतरती है औ...
13/12/2025

हुजरा जुवैरिया रज़ियल्लाहु तआला अन्हा

जब बाबुन्निसा से मस्जिदे नबवी में क़दम रखा जाए तो दिल पर एक अजीब सी नरमी उतरती है और रूह ऐसी रौशनी से भर जाती है जो ज़ुबान से बयान नहीं हो सकती। यहाँ पहुँच कर इंसान उस मक़ाम पर खड़ा होता है जहाँ वह पुरनूर हुजरा था जिसकी दीवारें ज़िक्रे मुस्तफ़ा की ख़ुश्बू से महकती थीं और जहाँ उम्मुल मोमिनीन सैयदा जुवैरिया रज़ियल्लाहु तआला अन्हा ने अपनी ज़िंदगी के شب–ओ–रोज़ गुज़ारे थे। यह वह जगह थी जहाँ हर साँस में ईमान की महकार थी, जहाँ हर लम्हा आक़ाए दो जहाँ ﷺ की क़ुर्बत का फ़ैज़ बरस रहा था, जहाँ रातें इबादत की ख़ामोशी से जगमगा उठती थीं और दिन मोहब्बत व ख़िदमत–ए–मुस्तफ़ा ﷺ के नूर से भरते थे।

इस जगह पर खड़े होकर ऐसा लगता है जैसे वक़्त थम गया हो और तारीख़ अपने पुराने वरक़ फिर से खोलकर दिखा रही हो कि कभी यहाँ एक पाकबाज़ बीबी थीं जिनकी चादरे–हया में वफ़ा की महक लिपटी हुई थी, जिनकी निगाहों में अज़्ज़–ओ–नियाज़ की चमक थी और जिनका दिल मोहब्बते–रसूल ﷺ के नूर से भरा हुआ था। मस्जिदे नबवी के इस गोशे में आज भी एक लतीफ़ सी रुहानी लरज़िश महसूस होती है—जैसे वह पाकीज़ा वजूद अब भी अपने रब के हुज़ूर सर झुकाए खड़ा हो, और जैसे उनकी इबादत का सोज़ अब भी फ़ज़ा में तैरता हुआ दिलों को नरम करता जाता हो। बाबुन्निसा से आते हुए क़दम ग़ैर–इरादी तौर पर आहिस्ता हो जाते हैं, गोया अदब ख़ुद चलने लगता है और इंसान बस उस फ़ना–फिर–रसूल ﷺ मक़ाम के सामने ख़ामोश सर झुकाए खड़ा रह जाता है।

सैयदा जुवैरिया रज़ियल्लाहु तआला अन्हा का नाम बर्राह था। बाद में मुस्तफ़ा करीम ﷺ ने आपका नाम जुवैरिया रखा, जो छोटे जवाहर की तरह क़ीमती और रौशन मानी रखता है। आप क़बीले ख़ुज़ाअह की शाख़ बनी–अल–मुस्तलिक के सरदार हारिस बिन अबी ज़रार की बेटी थीं। बचपन से ही आपके मिज़ाज में वक़ार, हया, नरमी और एक अजीब सी रुहानी संजीदगी थी। आप बोलतीं तो लहजा ऐसा लगता जैसे अल्फ़ाज़ नहीं फूल झर रहे हों। आपका चेहरा ऐसा था कि देखने वाला बासाख़्ता अदब से नज़रें झुका लेता और आपका वजूद ऐसा था कि औरत होकर भी एक ग़ैर–मामूली रौब और नूर महसूस होता था।

एक ज़माना आया कि जंगे बनी–अल–मुस्तलिक पेश आई। क़बीलों की आपसी कशमकश ने हालात को जंग की तरफ़ धकेल दिया और क़ुरैश के हुमायती क़बीलों में होने की वजह से यह क़बीला भी मदीनह की फ़ज़ा से टकरा गया। नतीजा यह हुआ कि अल्लाह ने नुसरत अत़ा फ़रमाई और क़बीला बनी–अल–मुस्तलिक मग़लूब हुआ। क़ैदी भी बने और माल–ए–ग़नीमत भी तक़सीम हुआ। इन्हीं क़ैदियों में सरदार की बेटी जुवैरिया भी थीं। एक शान–ओ–वक़ार के साथ मैदान में लाई गईं। दुनिया की क़ैद में थीं मगर दिल की पाकीज़गी ने चेहरे को झुकने नहीं दिया। उनके अंदर अजब अज्म था। हालाँकि क़ैदी बनने के बाद बहुत सी औरतों की आँखों से आँसू जारी थे, मगर जुवैरिया के अंदर अजीब सा सब्र था—एक नूरी वक़ार, जो बता रहा था कि इस बीबी के मुक़द्दर में दुनिया की इज़्ज़त नहीं बल्कि नबूवत के दरबार की निस्बत लिखी हुई है।

हज़रत साबित बिन क़ैस रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के हिस्से में आप आईं। उन्होंने फ़िदया मुक़र्रर किया और आपने सोचा कि मैं अपने क़बीले की सरदार बेटी हूँ, मुझे आज़ादी हासिल करनी चाहिए। लिहाज़ा आप उस मक़ाम पर आईं जहाँ आक़ाए करीम ﷺ तशरीफ़ फ़रमा थे। आपने अदब से अर्ज़ किया कि मैं फ़िदया देकर अपने आपको आज़ाद करना चाहती हूँ। जब उन्होंने रहमत–ए–अनवर ﷺ के सामने अपनी दरख़्वास्त पेश की तो नबी पाक ﷺ ने निगाह उठाकर देखा—और उस एक नज़र ने तारीख़ का रुख़ बदल दिया।

आपके अंदर ऐसी पाकीज़गी थी कि हज़रत ﷺ ने फ़रमाया:

“अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारे फ़िदये का इंतेज़ाम कर सकता हूँ,
और अगर चाहो तो तुम्हें अपने निकाह में ले लूँ।”

यह जुम्ला जब हवा में फैला होगा तो फ़रिश्तों ने भी ख़ुशी से तस्बीह पढ़ी होगी। जुवैरिया ने सर झुकाकर अर्ज़ किया:

“मैं हज़ूर के निकाह में आना चाहती हूँ।”

और यूँ वह लम्हा आया कि सरदार की बेटी ख़ातूने जन्नत नहीं, बल्कि ख़ातूने नबूवत बन गईं—और आपके इस निकाह की बरकत से सैकड़ों क़ैदी सहाबा ने अदब में आज़ाद कर दिए और कहते थे:
“यह सब हज़ूर की ससुराल है, हम इन्हें क़ैद में कैसे रखें!”

यूं पूरा क़बीला इस एक बीबी के क़दमों की बरकत से इस्लाम ले आया।

मदीनह तैय्यिबह में आपकी ज़िंदगी बेहद इबादत गुज़ार थी। आपके हुजरे से अक्सर रात के आख़िरी पहर में ज़िक्र–ए–इलाही की लहरें उठतीं। कभी ऐसा लगता जैसे वह अपने रब के हुज़ूर गिड़गिड़ा रही हों, कभी ऐसा महसूस होता जैसे कोई पाकीज़ा रूह अपने रब से राज़–ओ–नियाज़ कर रही हो। आपने फ़रमाया था कि:

“मैंने आज सुबह से एक ज़िक्र पढ़ा है जो अगर पूरे दिन के ज़िक्र से तौला जाए तो भारी हो जाएगा।”

और वह ज़िक्र था:

सुब्हानल्लाह, सुब्हानल्लाह अददा ख़ल्किहि
सुब्हानल्लाह रिदा नफ़्सिहि
सुब्हानल्लाह ज़िनता अरशिहि
सुब्हानल्लाह मिदादा कलिमातिहि

यह वही अज़ीम तसब्बुह था जो आपने हज़ूर ﷺ से सीखा और पूरी उम्मत तक पहुँचाया।

उन्होंने सुबह–ओ–शाम की दुआएँ भी बयान कीं जो हज़ूर ﷺ अपने घराने की पाकीज़ा ख़वातीन को सिखाते थे—जैसे:

बिस्मिल्लाहिल्लज़ी ला यज़ुर्रु मआस्मिहि शय्युन…
आऊज़ु बिकलीमातिल्लाहित्ताम्माति…
अस्बहना अला़ फ़ितरतिल इस्लाम…

आपसे सात अहादीस मروی हैं जिनमें ज़िक्र, अमल, घर की बरकत, और औरतों के एहकाम तक सब शामिल हैं।

पचास हिजरी में जब आपकी उम्र पैंसठ बरस हुई तो वह घड़ी आई—मदीने की हवाएँ नरम हो गईं, फ़ज़ा में हल्की सी सोज़नाक ख़ामोशी उतर आई और यह पाकीज़ा रूह अपने रब के हुक्म से दुनिया की क़ैद से आज़ाद हो गई। हाकिमे मदीनह मरवान ने आपका जनाज़ा पढ़ाया और आपको जन्नतुल बक़ी़ की बबरकत मिट्टी में दफ़्न किया गया।

आपकी क़ब्र आज भी मुहिब्बीन के लिए रहमत का मुक़ाम है। वहाँ खड़े होकर ऐसा लगता है कि दिल अपनी नरमी की तरफ़ वापस लौट रहा है और रूह में सैयदा जुवैरिया रज़ियल्लाहु अन्हा के तक़वा की ख़ुश्बू महसूस होती है—जैसे वह आज भी हया और नूर में डूबी अपने रब के सामने सर झुकाए खड़ी हों।

✨ Maula Ali (رضی اللہ عنہ ) Ki Viladat Ke Mauqe Par — Special Ziyarat Package ✨Al Akhtar Tours & Travels presents a bles...
11/12/2025

✨ Maula Ali (رضی اللہ عنہ ) Ki Viladat Ke Mauqe Par — Special Ziyarat Package ✨
Al Akhtar Tours & Travels presents a blessed opportunity to perform Ziyarat in Baghdad, Karbala & Najaf this 30th December 2025.

🕋 Total Package: ₹95,000/-
📍 Baghdad – 6 Days
📍 Karbala – 2 Days
📍 Najaf – 2 Days

💼 Package Includes:
✔ Iraq Visa
✔ Return Air Ticket
✔ Star Hotel Accommodation
✔ All Ziyarats by A.C. Bus
✔ 3-Time Meal Buffet System
✔ Ziyarats with Guidance
✔ Welcome Kit

For bookings & details:
📞 8980 786 700 / 9274 518 786

✨ Book your seats now and be part of this spiritually uplifting journey!

✨ “Labbayk Allāhumma Labbayk…” ✨A blessed beginning to a beautiful spiritual journey! 🌙🤍We are delighted to share the jo...
10/12/2025

✨ “Labbayk Allāhumma Labbayk…” ✨
A blessed beginning to a beautiful spiritual journey! 🌙🤍

We are delighted to share the joyful moments of our pilgrims who departed on 10th December 2025 from Ahmedabad International Airport with Al Akhtar Tours. 🕋✈️

These heartwarming memories reflect their excitement, pure intentions, and heartfelt duas as they embark on their sacred Umrah journey. 💫

At Al Akhtar Tours, your comfort and peace of mind come first—so you can devote your heart entirely to Ibadah while we take care of everything else. 🌸

📌 Missed this group?
Secure your seat in our upcoming Umrah batch!
📞 Call: +91 89807 86700

Address

SF/01, 02, Landmark Prime, Near Kismat Chowkdi, Vasna/Bhayli Main Road
Vadodara
390012

Opening Hours

Monday 9am - 8pm
Tuesday 9am - 8pm
Wednesday 9am - 8pm
Thursday 9am - 8pm
Friday 9am - 8pm
Saturday 9am - 8pm
Sunday 9am - 8pm

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