19/12/2025
मेरा एक तुर्की का दोस्त मदीना मुनव्वरा की मस्जिद-ए-नबवी के आँगन में खड़े होकर अपनी आँखों देखी घटना बताता है
मैं मस्जिद-ए-नबवी में खड़ा देख रहा था कि चार पुलिसवाले किसी का इंतज़ार कर रहे हैं। फिर एक शख्स नज़र आया तो पुलिसवालों ने दौड़कर उसे पकड़ लिया और उसके हाथ जकड़ दिए। 🕺
नौजवान ने कहा:
मुझे दुआ और तवस्सुल की इजाज़त दे दो।
मेरी बात सुन लो, मैं कोई भिखारी नहीं हूँ, न चोर हूँ।
फिर वह नौजवान चीखने लगा।
मैंने उसे देखा तो ऐसा लगा जैसे मैं उसे जानता हूँ।
मैं बताता हूँ कि मैंने उसे कैसे पहचाना।
दरअसल, मैंने उसे कितनी ही मरतबा बारगाह-ए-रसूल में रोते हुए देखा था। 🕌
यह एक अल्बानवी नौजवान था, जिसकी उम्र 35 या 36 साल के दरमियान थी, उसके सुनहरी बाल और हल्की सी दाढ़ी थी।
मैंने पुलिसवालों से कहा:
इसका कोई जुर्म नहीं है तो तुम इसके साथ ऐसा क्यों कर रहे हो?🕺
आखिर क्या इल्ज़ाम है इस पर?
उन्होंने कहा:
वह चला जा, पीछे हट, इस मामले में बोलने का तुझे कोई हक़ नहीं।🕺👮♂️
लेकिन मैंने फिर से कहा:
आखिर इसका तुम लोगों के साथ क्या मसला है?
क्या इसने कोई चोरी की है?🕺
उन्होंने कहा:
यह बंदा 6 साल से इधर मदीना शरीफ में रह रहा है, लेकिन इसका यह क़याम ग़ैर-क़ानूनी है।
हम इसे पकड़ कर वापस इसके मुल्क भेजना चाहते हैं, लेकिन यह हर बार एक ही चाल से भाग जाता है और जा कर रोज़ा-ए-रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम में पनाह ले लेता है। 🕌
हम इसे अंदर जा कर गिरफ़्तार नहीं करना चाहते थे।
मैंने पूछा:
तो अब इसके साथ क्या करोगे? 👮♂️
कहने लगे:
हम इसे पकड़ कर जहाज़ पर बिठाएँगे और वापस अल्बानिया भेज देंगे। 🇦🇱🕺
नौजवान मुसलसल रोए जा रहा था और कह रहा था:
क्या हो जाएगा अगर तुम मुझे छोड़ दोगे तो?
देखो, मैं कोई चोर नहीं हूँ🕺🇦🇱
मैं किसी से भीख नहीं माँगता
मैं तो इधर बस मुहब्बत-ए-रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम में रह रहा हूँ।
पुलिसवालों ने कहा: 👮♂️
नहीं, ऐसा जाइज़ नहीं है।
नौजवान ने कहा:
अच्छा, मुझे ज़रा आराम से रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से एक अर्ज़ कर लेने दो। 🕌🕺🇦🇱
फिर नौजवान ने अपना मुँह गुम्बद-ए-ख़िज़रा की तरफ कर लिया।
पुलिसवालों ने कहा: 👮♂️
चल कह, जो कहना है।
तो नौजवान ने गुम्बद-ए-ख़िज़रा की तरफ देखा और जो कुछ अरबी में कहा, मैं ने समझ लिया।
वह नौजवान कह रहा था:
या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम!
क्या हमारे दरमियान इत्तेफ़ाक़ नहीं हुआ था? 🕌
क्या मैंने अपने माँ-बाप को नहीं छोड़ा
क्या अपनी दुकान बंद कर के अपना घर-बार नहीं छोड़ा
और यह अहद कर के यहाँ नहीं आया था कि आप के जवार-ए-रहमत में रहा करूँगा?👮♂️🇦🇱
हुज़ूर! अब देख लीजिए
यह मुझे ऐसा करने से मना कर रहे हैं।
या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम!
या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम!
आप मदाख़लत क्यों नहीं फ़रमाते?
या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम!
आप मदाख़लत क्यों नहीं फ़रमाते?🕌
इतने में नौजवान बेहाल होने लगा तो पुलिसवालों ने ज़रा ढील दी और नौजवान नीचे गिर गया।
एक पुलिसवाले ने उसे ठोकर मारते हुए कहा:
ओ धोखेबाज़! उठ!
लेकिन नौजवान ने कोई रद्द-ए-अमल ज़ाहिर न किया।
मैंने पुलिसवालों से कहा:
यह नहीं भागेगा, तुम हम्माम से पानी लाओ और इसके चेहरे पर डालो।
लेकिन नौजवान कोई हरकत नहीं कर रहा था। 🕺
एक पुलिसवाले ने कहा:
इसे देखो तो सही, कहीं यह सचमुच मर ही न गया हो?
दूसरा पुलिसवाला कहने लगा:
इसे हमने कौन सी ऐसी ज़र्ब लगाई है, जिससे यह मर जाए?
फिर उन्होंने ऐम्बुलेंस को बुलाया।
वह इधर सामने वाले सात नंबर गेट से एक ऐम्बुलेंस ले आए।
उन्होंने नौजवान की शह-रग पर हाथ रख कर हरकत नोट की और नब्ज़ चेक की तो कहने लगे:
इसे तो मरे हुए 15 मिनट गुज़र चुके हैं!🕺🕌
अब पुलिसवाले जैसे मुजरिम हों, नीचे बैठ गए और रोने लगे।
वह मंज़र भी देखने वाला था।
उन में से एक तो अपने दोनों ज़ानूओं पर हाथ मारते हुए कहता था: 👮♂️🕺
हाय! हमारे हाथ क्यों न टूट गए
काश हमें मालूम होता कि इसे रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से इतनी शदीद मुहब्बत है!
हाय! हमारे हाथ क्यों न टूट गए!
उसके बाद ऐम्बुलेंस वालों ने उसे वहाँ से उठा लिया और जन्नतुल बक़ी की तरफ तजहीज़-ओ-तकफ़ीन वाले हिस्से में ले गए।👮♂️🕺
ग़ुस्ल के वक़्त मैं भी वहीं मौजूद था।
मैं उन्हें कहता था:
मुझे भी हाथ लगाने दो, मुझे भी इसकी चारपाई उठाने दो।
जब जनाज़ा तैयार हो कर नमाज़ के लिए जाने लगा तो पुलिसवालों ने मुझ से कहा:
हम ने जितना गुनाह उठाया है, बस उतना काफ़ी है।
इसे हमारे सिवा और कोई नहीं उठाएगा।
शायद इसी तरह हमें आख़िरत में कुछ रियायत मिल जाए।
मेरे सामने ही वह नौजवान बार-बार कह रहा था:
या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम! आप मदाख़लत क्यों नहीं फ़रमाते? 🕺🕌🇦🇱
देखा!
रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मदाख़लत फ़रमा दी और मलाकुल मौत ने अपना फ़रीज़ा अदा कर के उसे आप तक हमेशा के लिए पहुँचा दिया। 🕌🇦🇱
अल्लाह हमें भी अपने हबीब सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की वैसी ही मुहब्बत अता फ़रमाए, जैसी उस अल्बानवी नौजवान को अता फ़रमाई थी।
आमीन सुम्मा आमीन या रब्ब-उल-आलमीन! 😭🕺🇦🇱
नोट 👉 तकरीबन 8 महीने पहले का वाक्य