Shri Kashi Vishwanath Dham

Shri Kashi Vishwanath Dham The Kashi Vishwanath Dham is a famous Hindu temple at varanasi dedicated to Lord Shiva.The temple st
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महाशिवरात्रि के पावन-पुनीत अवसर पर शिवभक्ति में लीन काशी...जय बाबा विश्वनाथ! हर हर महादेव।
18/02/2023

महाशिवरात्रि के पावन-पुनीत अवसर पर शिवभक्ति में लीन काशी...जय बाबा विश्वनाथ! हर हर महादेव।

🕉️🙏 Har Mahadev 🙏🕉️
18/02/2023

🕉️🙏 Har Mahadev 🙏🕉️

ॐ में ही आस्था, ॐ में ही विश्वासॐ में ही शक्ति, ॐ में ही सारा संसारॐ से ही होती हैं अच्छे दिन की शुरुआतजय शिव शंकर!*महाश...
18/02/2023

ॐ में ही आस्था, ॐ में ही विश्वास
ॐ में ही शक्ति, ॐ में ही सारा संसार
ॐ से ही होती हैं अच्छे दिन की शुरुआत
जय शिव शंकर!
*महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं !*

Navratri 2022 Kalash Sthapna Timing: *नवरात्रि पर कब करें कलश स्थापना? जानें शुभ मुहूर्त, नियम और विधि*Kalash Sthapna Mu...
26/09/2022

Navratri 2022 Kalash Sthapna Timing: *नवरात्रि पर कब करें कलश स्थापना? जानें शुभ मुहूर्त, नियम और विधि*
Kalash Sthapna Muhurt:

आश्विन मास में आने वाली नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहा जाता है. शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना से जीवन की हर समस्या को दूर किया जा सकता है. इस साल शारदीय नवरात्रि 26 सितंबर से शुरू होने जा रहे हैं. नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना के साथ होती है.

*नवरात्रि पर कलश स्थापित करने से पहले जान लें शुभ मुहूर्त, नियम और विधि*

Shardiye Navratri 2022: नवरात्रि वर्ष में चार बार पड़ती है- माघ, चैत्र, आषाढ़ और आश्विन. इसमें चैत्र और आश्विन मास में आने वाली नवरात्रि का विशेष महत्व होता है. आश्विन मास में आने वाली नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहा जाता है. शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना से जीवन की हर समस्या को दूर किया जा सकता है. इस साल शारदीय नवरात्रि 26 सितंबर से शुरू होने जा रहे हैं. नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना के साथ होती है. घटस्थापना में मां दुर्गा को समर्पित पवित्र कलश की स्थापना की जाती है. आइए जानते हैं नवरात्रि पर घटस्थापना के नियम और मुहूर्त क्या हैं.

कलश स्थापना का मुहूर्त क्या है?
शारदीय नवरात्रि पर कलश की स्थापना आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है. इस बार प्रतिपदा तिथि 26 सितंबर को पड़ रही है. इसलिए कलश की स्थापना इस दिन शुभ मुहूर्त में की जाएगी. घटस्थापना का सबसे अच्छा समय सुबह 06 बजकर 28 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 01 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा, आप अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापित कर सकते हैं. प्रतिपदा तिथि पर सुबह 11 बजकर 48 मिनट से लेकर 12 बजकर 36 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा.

Navratri Ghatasthapana Muhurt: नवरात्रि के पहले दिन इस अशुभ घड़ी में ना करें घटस्थापना, जानें शुभ समय

कलश का मुंह खुला न रखें- शारदीय नवरात्रि पर अगर आप कलश की स्थापना करने वाले हैं तो ध्यान रखें कि कलश का मुंह खुला ना रहे. इसे किसी ढक्कन से ढककर ही रखें. ढक्कन को चावलों से भर दें और उसके ठीक बीचोबीच नारियल रखें.

गलत दिशा में कलश न रखें- कलश को गलत दिशा में स्थापित करने से बचें. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) देवताओं की दिशा होती है. इस दिशा में ही कलश को स्थापित किया जाना चाहिए.

कलश स्थापना से पहले करें ये काम- कलश को स्थापित करने से पहले देवी मां के सामने अखंड ज्योति प्रज्वलित करें. इस दिशा को आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) में रखें. कलश स्थापित करते वक्त साधक को अपना चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा में ही रखना चाहिए.

साफ-सफाई का रखें ध्यान- घर में आप जिस जगह पर कलश स्थापित करने वाले हैं या देवी की चौकी लगाने वाले हैं, वहां स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें. घटस्थापना चंदन की लकड़ी पर करें तो शुभ होगा.

*इन जगहों पर ना करें घटस्थापना*- घटस्थापना का स्थल बाथरूम या किचन के आस-पास नहीं होना चाहिए. अगर पूजा स्थल के ऊपर कोई आलमारी या सामान रखने की जगह है तो उसे भी अच्छी तरह साफ कर लें.

*कलश स्थापना की विधि*

कलश स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए. नित्य कर्म और स्नान के बाद ही कलश स्थापित करें. शारदीय नवरात्रि पर अगर आप घर में कलश स्थापना करने जा रहे हैं तो सबसे पहले कलश पर स्वास्तिक बनाएं. इस पर एक कलावा बांधें और उसे जल से भर दें. कलश में साबुत सुपारी, फूल, इत्र, अक्षत, पंचरत्न और सिक्का डालना ना भूलें.

इसके बाद पूजा स्थल से अलग एक चौकी पर लाल या सफेद रंग का कपड़ा बिछाएं. इस पर अक्षत से अष्टदल बनाएं और जल से भरे कलश को यहां स्थापित कर दें. इस कलश में शतावरी जड़ी, हलकुंड, कमल गट्टे और चांदी का सिक्का डालें. फिर दीप प्रज्वलित कर इष्ट देवों का ध्यान करें. इसके बाद देवी दुर्गा के मंत्रों का जाप करें. कलश स्थापना के साथ ही मिट्टी के एक बर्तन में ज्वार बोने की परंपरा है.।

सावन के पहले सोमवार पर काशीपुराधिपति की नगरी बम-बम, बाबा दरबार में दर्शनार्थियों का बना रिकॉर्ड!💐💐🌸🌸💮💮🏵️🏵️🌹🌹🥀🥀🌺🌺🌻🌻🌼🌼🌷🌷💐💐...
19/07/2022

सावन के पहले सोमवार पर काशीपुराधिपति की नगरी बम-बम, बाबा दरबार में दर्शनार्थियों का बना रिकॉर्ड!
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सावन के पहले सोमवार पर काशी पुराधिपति की नगरी हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गुंजायमान है। हर-हर, बम-बम के बोल संग गूंजती कांवड़ियों की बोली के साथ आस्थावानों की टोली लगातार आगे बढ़ रही है। कोरोना के कारण दो साल बाद सावन की रौनक लौटी है।

दोपहर दो बजे तक करीब तीन लाख भक्तों ने बाबा दरबार में मत्था टेका है। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है। मंदिर प्रशासन के अनुसार सावन के पहले सोमवार पर छह लाख से अधिक शिवभक्तों के आने की संभावना है। भक्तों को श्री काशी विश्वनाथ का झांकी दर्शन ही मिल रहा है। जलाभिषेक गर्भगृह के बाहर लगे अरघे से ही किया जा रहा है।

श्रद्धा, आस्था और उमंग की हिलोरें के साथ भक्तिभाव से श्रद्धालु आदि विश्वेश्वर का जलाभिषेक कर रहे हैं। सावन में पहली बार शिवभक्त गंगद्वार से गंगाजल लेकर बाबा विश्वनाथ के धाम पहुंच रहे हैं। तेज धूप के बीच ललिता घाट पर लंबी कतार लगी है। इसके अलावा कैथी मार्केंडय मंदिर, सारनाथ स्थित सारंगदेव महादेव, गौरी केदारेश्वर, महामृत्युंजय, जागेश्वर महादेव, शूल टंकेश्वर, तिल भांडेश्वर, बैजनत्था मंदिर, रामकुंड स्थित रामेश्वर महादेव समेत अन्य शिवालयों में भक्तों का सैलाब उमड़ा है।

हर तरफ बोल बम और हर हर महादेव के गगनभेदी जयकारे गूंज रहे हैं। रविवार शाम से ही बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने के लिए कतारें लगना शुरू हो गई थी। सभी शिवभक्त मंगला आरती की प्रतीक्षा कर रहे थे, जिससे उनके लिए काशी विश्वनाथ मंदिर के कपाट खुलें और जिलाभिषेक कर दर्शन करें। मंगला आरती होते ही दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हुआ जो अनवरत जारी है।

****बाबा विश्वनाथ के भक्तों के लिए रेड कार्पेट***👉🏻

बीते 13 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री काशी विश्वनाथ धाम का उद्घाटन किया था और उसके बाद यह पहला सावन है जब देश भर से कांवड़िए बाबा के धाम जलाभिषेक के लिए आ रहे हैं। श्रद्धालुओं के लिए कराई गई बैरिकेडिंग में रेड कार्पेट बिछाया गया है।

चितरंजन पार्क में कांवड़ियों के लिए शिविर की शुरुआत भी हो गई है। कांवड़ियों की कतार गेट नंबर एक ढुंढिराज गणेश से होते हुए बांसफाटक से आगे गोदौलिया तक लगी है। ललिता घाट से बाबा दरबार तक कतार लगी है।

*****घर से आधे घंटे पहले निकलें, रूट डायवर्जन जरूर देखें*****👉🏻

सावन के पहले सोमवार पर शहर में कांवड़ियों के आगमन को देखते हुए डायवर्जन है। घर से निकलने से पहले रूट डायवर्जन जरूर देखें। बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ धाम को जोड़ने वाले मार्गों को नो व्हीकल जोन किया गया है। एडीसीपी ट्रैफिक डीके पुरी के अनुसार मैदागिन-गौदोलिया-सोनारपुरा चौराहा, गुरुबाग-रामापुरा-बेनिया तिराहा, रवींद्रपुरी स्थित ब्राडवे होटल तिराहा-सोनारपुरा-गोदौलिया और भेलूपुर चौराहा से रामापुरा चौराहा तक नो व्हीकल जोन रहेगा। मंगलवार की सुबह आठ बजे तक इन रूटों पर किसी भी प्रकार के वाहनों की आवाजाही नहीं है। सिर्फ पैदल ही लोग आवाजाही कर रहे हैं। मार्कंडेय महादेव धाम में जलाभिषेक को देखते हुए कैथी तिराहे पर धाम से तीन किलोमीटर दूर बैरिकेडिंग करते हुए रविवार शाम से ही सभी वाहनों को रोक दिया गया। श्रद्धालु पैदल ही मंदिर व गंगा घाट तक जा रहे हैं।

अग्नि सुरक्षा के अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हुआ श्री काशी विश्वनाथ धाम!काशी विश्वनाथ धाम अत्याधुनिक फायर फाइटर उपकरणों से...
21/06/2022

अग्नि सुरक्षा के अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हुआ श्री काशी विश्वनाथ धाम!

काशी विश्वनाथ धाम अत्याधुनिक फायर फाइटर उपकरणों से लैस किया गया है। आग लगने पर स्वचालित उपकरण खुद ही आग को नियंत्रित कर लेंगे। परिसर के किसी भी भवन में आग लगते ही उस पर कुछ ही देर में काबू पाया जा सकता है। दर्शनार्थियों की संख्या देख सुरक्षा के लिहाज से धाम को पूरी तरह अग्नि सुरक्षा के अत्याधुनिक उपकरणों से लैस कर दिया गया है।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनिमेष सिंह ने बताया कि काशी विश्वनाथ धाम में मंदिर समेत सभी नव निर्मित भवनों की सुरक्षा के लिए अग्निशमन विभाग ने अत्याधुनिक उपकरण लगाए हैं। आग लगने पर तत्काल अत्याधुनिक तकनीक के फायर फाइटर उपकरण खुद ही आग को नियंत्रित करेंगे। उन्होंने बताया कि करीब एक लाख 45 हजार लीटर का वाटर टैंक मंदिर परिसर में है। अत्याधुनिक पंप लगे हैं। जॉकी पंप ऑटो मोड में रहता है। आग की भनक लगते ही यह चालू हो जाता है। जरूरत पड़ने पर इलेक्ट्रिकल पंप भी खुद ही स्टार्ट हो जाता है जो अधिक प्रेशर से पानी देता है। किसी कारण से दोनों नहीं चल पाते हैं तो तीसरा डीजल पंप खुद चालू हो जाता है। पूरे परिसर में 96 फायर हाइड्रेंट लगे हैं। इसमें एक्सटर्नल 41 और इंटरनल 55 फायर हाइड्रेंट और 494 स्मोक डिटेक्टर, 46 हीट डिटेक्टर लगे हैं। इसके अलावा अलग तरह के करीब 224 फायर एक्सटिंग्विशर भी परिसर में लगे हैं।

सीसीटीवी कैमरों से होगी निगरानी
मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि 162 सीसीटीवी कैमरे से कंट्रोल रूम में निगरानी होती है। अग्निशमन कर्मचारी फायर पैनल पर भी नजर रखते हैं। ताकि आग लगने वाली सही जगह की पहचान हो सके और इसे तुरंत नियंत्रण किया जा सके। इसके अलावा विभाग के पास पोर्टेबल पंप है जिससे गंगा से सीधे पानी लिया जा सकता है।
जल्द शुरू होंगी व्यावसायिक गतिविधियां
श्री काशी विश्वनाथ धाम विस्तारीकरण व सौंदर्यीकरण के बाद कुल लगभग 50 हजार 280 वर्ग मीटर में फैल गया है। धाम में शिव भक्तों की तादात बढ़ती जा रही है। आने वाले समय में नव निर्मित भवनों में व्यवसायिक गतिविधियां भी शुरू होंगी। साथ ही मुमुक्षु भवन, गेस्ट हाउस, म्यूजियम, लाइब्रेरी, जलपान गृह आदि का संचालन शुरू होगा। ऐसे में अग्नि सुरक्षा के सभी उपाय कर लिए हैं।

गजल गायक पंकज उधास ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में किया दर्शन-पूजन, कहा - 'अद्भुत है श्री काशी विश्वनाथ धाम' देश के ख्‍य...
12/04/2022

गजल गायक पंकज उधास ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में किया दर्शन-पूजन, कहा - 'अद्भुत है श्री काशी विश्वनाथ धाम'

देश के ख्‍यात गजल गायक पंकज उधास ने सोमवार की शाम को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में अपने सहयोगियों के साथ दर्शन -पूजन करने के बाद श्री काशी विश्वनाथ धाम को काफी भव्‍य बताया।

प्रसिद्ध गजल गायक पंकज उदास सुबह श्री काशी विश्वनाथ मंदिर दर्शन पूजन के लिए पहुंचे। इस दौरान उन्‍होंने विधि विधान से दर्शन पूजन किए। पंकज उधास सोमवार की सुबह अपने अन्य सहयोगियों समेत न्यास सदस्य दीपक मालवीय के साथ बाबा दरबार पहुंचे। न्यास सदस्य की देख रेख में अर्चक डॉ. श्रीकांत मिश्रा के आचार्यत्व में उन्होंने षोडशोपचार पूजन व स्पर्श दर्शन किया। इसके बाद विश्वनाथ धाम में भ्रमण कियाा।

जाते समय न्यास सदस्य ने अंगवस्त्र और बाबा की प्रसाद पोटली भेंट की। उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद बना रहे। गोदौलिया द्वार पर प्रशंसकों ने सेल्फी ली और हर-हर महादेव के उद्घोष से स्वागत किया। उन्‍होंने काशी विश्‍वनाथ धाम को अद्भुत बताते हुए बाबा दरबार की भव्‍यता की तारीफ भी की।

पद्मश्री पंकज उधास के गीत-गजलों से गूंजा रूद्राक्ष : जियें तो जियें कैसे बिन आपके, लगता नहीं दिल कहीं बिन आपके... फिल्म साजन का ये गीत जैसे ही गूंजा रूद्राक्ष अंतराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन कक्ष में लोग झूम उठे। तीन दशक बाद भी इस गीत और इस गीत को स्वर देने वाले मशहूर गजल गायक पद्मश्री पंकज उधास के लिए लोगों में जबरदस्त दीवानगी दिखी। मौका था अग्रवाल महासभा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा रविवार को आयोजित शाम-ए-बनारस कार्यक्रम का।

रामनवमी का मौका था इसलिए पंकज उधास ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत मीराबाई के भजन पायो जी मैंने राम रतन धन पायो... से की। बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ को समर्पित भजन ना फूल चढ़ाऊं ना माला चढ़ाऊं , गीतों की गंगा तुझको चढ़ाऊं... सुनाया। कोरोना काल की यादों के साथ गजल सुनाया निकलो ना बेनकाब जमाना खराब है...। अगली प्रस्तुति सबको मालूम है मैं शराबी नहीं फिर भी कोई पिलाये तो मैं क्या करूं... से माहौल बना दिया। हर लय पर लोगों की तालियां बजती रहीं। नज्म दुख-सुख था एक है सबका अपना या बेगाना, एक वो भी था जमाना एक ये भी है जमाना... के जरिए वक्त की करवट को बताया। गीत-गजल का दौर देर तक चलता रहा। शुभारंभ अतिथि कलाकार पद्मश्री पंकज उधास ने दीप प्रज्वलित कर व महाराज अग्रसेन की मूर्ति पर माल्यार्पण कर किया। स्वागत संस्था अध्यक्ष संतोष कुमार अग्रवाल, संचालन डा. राजेश अग्रवाल व डा. रचना अग्रवाल, संयोजन नीरज अग्रवाल, धन्यवाद ज्ञापन डा. मधु अग्रवाल, आमोद अग्रवाल व सलिल अग्रवाल ने किया।

Jyotirlingas Of Shiva: काशी विश्वनाथ मंदिर है भगवान शंकर का सातवां ज्योतिर्लिंग, यहां है भोलेनाथ का पावन स्थान!धार्मिक म...
22/03/2022

Jyotirlingas Of Shiva: काशी विश्वनाथ मंदिर है भगवान शंकर का सातवां ज्योतिर्लिंग, यहां है भोलेनाथ का पावन स्थान!

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग हैं. देश के अलग- अलग हिस्सों में ये ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं. ऐसा माना जाता है कि इन स्थानों पर भगवान शिव स्वयं विराजमान हैं. मान्यता है कि भगवान शिव के इन ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल जाती है.

देश भर में भगवान भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंग मौजूद हैं. इनमें से एक है काशी विश्वनाथ मंदिर, जो भगवान शिव का प्रसिद्ध और सातवां ज्योतिर्लिंग हैं.काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है. मान्यता है कि यहां पर भगवान शिव स्वयं विराजते हैं. धर्म और आस्था का एक प्रमुख केंद्र है. काशी नगरी देश की प्राचीन नगरी में से एक हैं. मान्यता है कि भगवान शिव (Shiv) के इन ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल जाती है और मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है. आज हम इन्हीं ज्योतिर्लिंगों में से भगवान शिव के सातवें ज्योतिर्लिंग माने जाने वाले इस स्थान के बारे में आपको बताने जा रहे है.

सोमवार का पावन दिन देवो के देव महादेव (Lord Mahadev) को समर्पित होता है, इसलिए भोलेनाथ (Bholenath) को सोमेश्वर के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि अगर सोमवार के दिन सच्चे मन से शिव जी की पूजा की जाए तो भगवान भक्त की हर मनोकामना पूरी करते हैं. वैसे तो सालभर भगवान शिव (Lord Shiva) के पावन धामों में भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन माना जाता है कि सोमवार के दिन ज्योतिर्लिंग के स्मरण और पूजा से कई गुना पुण्य मिलता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग हैं. देश के अलग- अलग हिस्सों में ये ज्योतिर्लिंग (Jyotirlinga) स्थापित हैं. ऐसा माना जाता है कि इन स्थानों पर भगवान शिव स्वयं विराजमान हैं. हिंदू धर्म में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने का विशेष महत्व माना जाता है.

माना जाता है कि सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से भगवान खुश होकर भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं. शिवजी की पूजा करते समय शिव चालीसा या शिवाष्टक का पाठ जरूर करना चाहिए. आज के दिन भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए भक्त सच्चे मन से व्रत रखकर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं. वहीं, कुंवारी कन्याओं के लिए 16 सोमवार का व्रत काफी उत्तम माना जाता है.

भगवान शिव का सातवां ज्योतिर्लिंग | Seventh Jyotirlinga Of Lord Shiva

माना जाता है कि भगवान शिव का सातवां ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ मंदिर बनारस में स्थित है. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर बनारस में गंगा नदी के पश्चिम तट पर स्थित है. काशी भगवान शिव और माता पार्वती का सबसे प्रिय स्थान माना जाता है. यहां महादेव के दर्शन से पहले भैरव जी के दर्शन करना जरूरी माना जाता है, इसके पीछे मान्यता है कि भैरव जी के दर्शन किए बगैर विश्वनाथ के दर्शन का लाभ नहीं मिलता है. मान्यता है कि भगवान श्री हरि विष्णु ने भी काशी में ही तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था. माना जाता है कि श्रावण मास में भगवान शिव पृथ्वीलोक भ्रमण करते हैं, इस दौरान वे काशी भी आते हैं, लेकिन काशी का महादेव के परिपेक्ष में एक दूसरा वृहद महत्व है.

काशी से जुड़ी मान्यता | Beliefs related to Kashi

पौराणिक कथाओं के अनुसार, काशी में प्राण त्यागने वाले व्यक्ति को सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है. मान्यता यह भी है कि भगवान महादेव खुद यहां मरते हुए व्यक्ति के कानों में तारक मंत्र का उपदेश सुनाते हैं. मत्स्य पुराण में भी यह वर्णित है. इसके चलते पूरे देश से लोगों अपने मृत हो चुके परिजनों की अस्थियां आदि विसर्जित करने काशी आते हैं. विदेश से भी सनातन धर्म के प्रति रूझान रखने वाले लोग काशी आते हैं. मान्यता है कि प्रलय आने पर भी कभी काशी का कभी लोप नहीं हुआ, ऐसा इसलिए क्योंकि पहले ही भोलेनाथ खुद काशी को अपने त्रिशूल पर उठा लेते हैं, इस तरह काशी की सुरक्षा बच जाती है. प्रलय शांत होने पर शिवजी काशी को वापस नीचे उतार देते हैं, इसीलिए कहा जाता है कि काशी के कण-कण में भगवान शिव विराजमान है.

BHOLE KI NAGARI 🔱 Har Har Mahadev. Captured By📸-  visited Shri Kashi Vishwanath Dham Few Days Back.                     ...
29/01/2022

BHOLE KI NAGARI 🔱 Har Har Mahadev.
Captured By📸- visited Shri Kashi Vishwanath Dham Few Days Back.



21/01/2022

*गणतंत्र दिवस की झांकी में दुनिया देखेगी काशी पुराधिपति का वैभव, राजपथ पर दिखेगा बाबा का धाम!!*

भव्य, दिव्य और नव्य श्री काशी विश्वनाथ धाम का वैभव इस बार गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजपथ पर बिखरेगा। 26 जनवरी को झांकी में परेड के दौरान बाबा का धाम इस बार आकर्षण का केंद्र होगा। प्रदेश की झांकी में इस बार काशी विश्वनाथ धाम व एक जिला एक उत्पाद को शामिल किया गया है। झांकी में बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार के साथ ही धर्म नगरी काशी की परंपरा, कला और संस्कृति के रंग भी नजर आएंगे।

सनातन धर्मियों के लिए आस्था और दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बाबा काशी विश्वनाथ का धाम राजपथ पर नजर आएगा। गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने वाली यूपी की झांकी में काशी विश्वनाथ धाम के साथ ही सुरसरि भी नजर आएंगी।

यूपी के अलावा उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय और पंजाब की झांकियों को शामिल किया गया है। दिल्ली में झांकियों को तैयार किया जा रहा है।

इसे इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार के साथ धर्म की नगरी काशी की परंपरा तथा संस्कृति दिखाई दे। इसके पूर्व महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की झांकी राजपथ पर सजाई जा चुकी है।

विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष में प्रदेश की झांकी में विद्यापीठ को चयनित किया गया था। गणतंत्र दिवस के आयोजन इस बार कोविड प्रोटोकॉल के साथ आयोजित किए जा रहे हैं। झांकी में धाम की भव्यता का प्रदर्शन होगा।

Address

221001
Varanasi
221001

Opening Hours

Monday 10am - 6pm
Tuesday 10am - 6pm
Wednesday 10am - 5pm
Thursday 10am - 6pm
Friday 10am - 6pm
Saturday 10am - 6pm

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+917278072782

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