05/06/2026
चार दिन की खुशी
खुशी कांच का एक खिलौना है,
जिसे एक न एक दिन खोना है।
अगर ठहर जाए यह उम्र भर को,
तो दर्द का वजूद ही खोना है।
चार दिन की ही भली यह कली,
जो हर दिल में एक चाह जगाती है।
अगर हर पल ही मुस्कुराते रहे,
तो आंसुओं की कीमत घट जाती है।
धूप के बाद ही छांव अच्छी लगती है,
पतझड़ के बाद ही बहार सजती है।
यह थोड़े दिनों का आना-जाना ही,
जिंदगी जीने का सलीका सिखाती है।