काशी :-
बाबा भोले की नगरी है ये काशी | ये वह पवित्र भूमि है जहाँ बहती थी तीन नदिया ( गंगा, अस्सी, वरुणा ) और जहाँ विराजते है देवो के देव महादेव, जिस काशी के कोतवाल है बाबा भैरो नाथ, जिसकी मिटटी का तिलक लगाता है ये पूरा भारत और जहाँ पे मरना लोगो का जीवन मरन के भव सागर से तरना माना जाता है | ये वह भूमि है जहाँ लोगो की सुरुवात हर हर महादेव के उद्घोष से होता है | ऐसी है हमारी काशी |
बनारस
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बनारस वह शब्द है जहाँ हर बने ( जायेके ) मै एक रस होता है | जहाँ सुबह लोग अपने खाने की सुरुवात कचौड़ियों और जलेबियों से करते है | और पान यहाँ का मुख्य रस है | और यहाँ के चाट के तो क्या कहने मंन ललचाये राहा ना जाये | ऐसा है यहाँ का रस जो बनता है हमारा बनारस |
वाराणसी :-
वाराणसी ये आज का नाम है कहते है की ये नाम वरुणा और अस्सी से मिल के बना है | इस लिए इसका नाम वाराणसी पड़ा है | आज की वाराणसी नए विचारो वाला है |
आज यहाँ सारे नए सुविधाओ से युक्त है | यहाँ तीन विश्वविद्यालय है जो अपनी पहचान पूरी दुनिया मै रखती है | ये वाराणसी व्यापारियों के लिए एक बहुत ही बड़ा बाजार है | ये दुनिया के व्यस्त शहरों मै से एक है | फिर भी लोग यहाँ आके ठहर से जाते है | और यहाँ के अल्ल्हड़पन के दीवाने हो जाते है | ऐसा है आज का वाराणसी |
एक बार पधारिये तो हमारे शहर बनारस मै आप .. आप का स्वागत है ||
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